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Science : समुद्र की गहराई में रहने वाला एक छोटा, काँटेदार जीव, समुद्री अर्चिन, भले ही मामूली लगता हो, लेकिन इसकी एक दिलचस्प कहानी ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि इस जीव का कोई अलग "दिमाग" नहीं है, बल्कि इसका पूरा शरीर एक अलग "दिमाग" की तरह काम करता है!
नेटवर्क-18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बर्लिन के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के जीवविज्ञानी जैक उलरिच-लटर और उनकी टीम ने यह शोध किया। शोध के दौरान, वैज्ञानिकों ने पाया कि इन जीवों में इंसानों या जानवरों की तरह एक केंद्रीकृत मस्तिष्क नहीं होता, बल्कि इनके पूरे शरीर में फैला एक जटिल तंत्रिका तंत्र होता है, जिसमें मस्तिष्क जैसी ही क्षमताएँ होती हैं।
टीम का कहना है कि यह खोज पारंपरिक जैविक सोच को चुनौती देती है, जिसमें यह माना जाता था कि केवल बड़े जीव ही सोचने की प्रणाली विकसित कर सकते हैं।
समुद्री अर्चिन, इकाइनोडर्मेटा नामक समुद्री परिवार से संबंधित हैं, वही परिवार जिसमें स्टारफिश और समुद्री खीरे जैसे जीव भी शामिल हैं। इन जीवों का विकास भी काफी दिलचस्प है। बचपन में, इनका शरीर इंसानों की तरह दो भागों में बँटा होता है, लेकिन जैसे-जैसे ये बड़े होते हैं, इनका आकार गोल हो जाता है। वैज्ञानिक वर्षों से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एक ही जीनोम दो अलग-अलग शारीरिक संरचनाएँ कैसे बना सकता है। यह नई खोज इस रहस्य पर कुछ प्रकाश डालती है।
इस अध्ययन के लिए, वैज्ञानिकों ने बैंगनी समुद्री अर्चिन पर शोध किया। उन्होंने पाया कि इनमें धड़ नहीं होता। अन्य जीवों में शरीर के मध्य भाग को बनाने वाले जीन इस जीव के आंतरिक अंगों, जैसे आँतों और जल नलिकाओं में सक्रिय पाए गए। ये नलिकाएँ इन जीवों को हिलने-डुलने, साँस लेने और भोजन पचाने में मदद करती हैं।
शोध में यह भी पता चला कि समुद्री अर्चिन में सैकड़ों विभिन्न प्रकार की न्यूरॉन कोशिकाएँ होती हैं। इन कोशिकाओं में वही 'सिर के जीन' होते हैं जो मनुष्यों और अन्य जानवरों के मस्तिष्क में पाए जाते हैं। इसका मतलब है कि हालाँकि इनका कोई मस्तिष्क केंद्र नहीं होता, लेकिन इनका पूरा शरीर एक विशाल मस्तिष्क नेटवर्क होता है!
हैरानी की बात है कि समुद्री अर्चिन प्रकाश को महसूस कर सकते हैं। इनके शरीर के कुछ हिस्सों में रेटिना जैसी संरचनाएँ होती हैं, जो साबित करती हैं कि ये जीव अपने आस-पास के प्रकाश के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं। कुछ कोशिकाओं में तो दो अलग-अलग प्रकाश ग्राही भी होते हैं। इसका मतलब है कि ये जीव देख तो नहीं सकते, लेकिन अपने आस-पास के बदलावों को ज़रूर महसूस कर सकते हैं।
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