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Science: 53 साल पहले सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किया गया एक असफल अंतरिक्ष यान अब वापस पृथ्वी पर गिरने की कगार पर है। 'कोस्मोस 482' नामक इस स्पेसक्राफ्ट को वर्ष 1972 में शुक्र ग्रह (Venus) के अध्ययन के लिए भेजा गया था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के चलते यह मिशन असफल हो गया और यान पृथ्वी की कक्षा में ही फंसकर रह गया। अब विशेषज्ञों का कहना है कि यह यान 8 से 12 मई 2025 के बीच किसी भी वक्त पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर सकता है।
कोस्मोस 482: एक नाकाम लेकिन ऐतिहासिक मिशन
कोस्मोस 482 को सोवियत संघ ने अपने महत्वाकांक्षी शुक्र ग्रह मिशन का हिस्सा बनाकर लॉन्च किया था। इससे पहले वेनेरा 7 और वेनेरा 8 जैसे यान शुक्र ग्रह पर सफलतापूर्वक उतर चुके थे। इसी कड़ी में कोस्मोस 482 को भी शुक्र की सतह पर भेजने की योजना थी। लेकिन जिस रॉकेट (Soyuz) से इसे भेजा गया, उसमें तकनीकी खराबी आ गई, जिससे यह यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल पाया और वहीं फंसकर रह गया।
कब और कैसे गिरेगा?
Live Science की रिपोर्ट के अनुसार, कोस्मोस 482 करीब 242 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उल्कापिंड की तरह पृथ्वी की ओर गिरेगा। यह यान आकार में लगभग 1 मीटर चौड़ा और वजन में करीब 495 किलोग्राम भारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह किसी तोप के गोले जैसा प्रभाव डाल सकता है, लेकिन यह कहां गिरेगा, इसका सटीक अनुमान अब तक नहीं लग पाया है।
भारत सहित कई देश संभावित खतरे की जद में
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यान 52° उत्तरी अक्षांश से लेकर 52° दक्षिणी अक्षांश के बीच कहीं भी गिर सकता है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और एशिया के बड़े हिस्से — जिनमें भारत और उसके पड़ोसी देश भी शामिल हैं, इस संभावित गिरावट के दायरे में आते हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा है कि इसके किसी आबादी वाले क्षेत्र में गिरने की संभावना बेहद कम है, जबकि यह ज्यादा संभावना है कि यह किसी समुद्री क्षेत्र में गिरे।
एक टुकड़ा पहले भी गिर चुका है
कोस्मोस 482 लॉन्च के कुछ समय बाद ही कई टुकड़ों में बंट गया था। इन टुकड़ों में से मुख्य भाग मई 1981 में वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर चुका है। लेकिन जो हिस्सा अब गिरने जा रहा है, वह डिसेंट मॉड्यूल (descent craft) है, जो पिछले 53 वर्षों से कक्षा में चक्कर काट रहा था।
अंतरिक्ष मलबे का बढ़ता खतरा
कोस्मोस 482 एकमात्र ऐसा स्पेसक्राफ्ट नहीं है जो दशकों बाद पृथ्वी पर लौट रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस वक्त अंतरिक्ष में 1 सेंटीमीटर से बड़े 12 लाख से अधिक टुकड़े मौजूद हैं। इनमें से 10 सेंटीमीटर से बड़े करीब 50,000 टुकड़े पृथ्वी की कक्षा में घूम रहे हैं। ESA का यह भी कहना है कि औसतन हर हफ्ते तीन बार कोई न कोई रॉकेट या उपग्रह का टुकड़ा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है।
क्या है खतरा?
भले ही वैज्ञानिक इस बात पर जोर दे रहे हों कि कोस्मोस 482 के आबादी वाले क्षेत्र में गिरने की संभावना कम है, लेकिन इसका भारी वजन और तेज़ गति इसे संभावित खतरा बना देती है। यदि यह किसी रिहायशी इलाके में गिरा तो जान-माल का नुकसान संभव है। इसके अलावा, यह घटना अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन की चुनौती पर भी सवाल खड़े करती है।
निष्कर्ष
कोस्मोस 482 की वापसी एक बार फिर यह याद दिला रही है कि अंतरिक्ष की असफल कोशिशें भी धरती पर लौटकर खतरनाक साबित हो सकती हैं। अंतरिक्ष एजेंसियों को अब सिर्फ मिशन की सफलता ही नहीं, बल्कि असफल मिशनों के प्रभावों और मलबे के प्रबंधन पर भी गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत है। आने वाले कुछ दिन इस ऐतिहासिक लेकिन अनियंत्रित यान की वापसी पर पूरी दुनिया की निगाहें रहेंगी। भारत सहित कई देशों के लिए यह एक सतर्कता का समय है।
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