विज्ञान

Science:चांद को फाड़ देने का प्लान, NASA का पागलपन

Sarita
2 Dec 2025 8:30 AM IST
Science:चांद को फाड़ देने का प्लान, NASA का पागलपन
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Science: आज दुनिया चांद पर खोज करने और बसने के मिशन पर काम कर रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब अमेरिका ने चांद पर जाने का प्लान बनाया था? यह सुनने में थोड़ा डरावना और किसी फिल्म जैसा लग सकता है, लेकिन यह एक बहुत ही असली प्लान था।
स्पुतनिक-1 सैटेलाइट
कोल्ड वॉर के दौरान, 1950 के दशक में अमेरिका और सोवियत यूनियन (रूस) स्पेस रेस में लगे हुए थे। दोनों देश स्पेस में सबसे पहले बड़ी कामयाबी हासिल करना चाहते थे। इसी दौरान, 1957 में सोवियत यूनियन ने स्पुतनिक-1 नाम का पहला सैटेलाइट स्पेस में लॉन्च किया। यह अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका था।
इसके बाद अमेरिका को डर था कि रूस चांद पर अपना झंडा सबसे पहले उतार सकता है। इसी डर से कुछ अमेरिकी साइंटिस्ट और एयर फोर्स ने एक बहुत ही खतरनाक प्लान बनाया। इस खतरनाक प्लान को प्रोजेक्ट A119 कहा गया। इस प्लान के तहत अमेरिका चांद पर हाइड्रोजन बम गिराना चाहता था। यह बम एटम बम से कई गुना ज़्यादा खतरनाक है। अमेरिका का विज़न था कि बम फटने के बाद, चांद पर एक बहुत बड़ा धमाका होगा और रोशनी होगी, जो धरती पर सबको दिखेगी। इससे दुनिया को साफ़ मैसेज जाएगा कि अमेरिका सबसे ताकतवर है और उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता।
इस प्लान को पूरा करने के लिए साइंटिस्ट लियोनार्ड राइफल और उनकी टीम ने मई 1958 से जनवरी 1959 तक एक रिपोर्ट तैयार की। प्लान था कि चांद पर उस लाइन पर बम फोड़ना है जहां रोशनी और अंधेरा मिलते हैं। इसे टर्मिनेटर लाइन कहते हैं, जहां धमाके से सबसे ज़्यादा चमक पैदा होती है। मिशन को सीक्रेट रखा गया था लेकिन फिर इस खतरनाक प्लान को रोक दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों को डर था कि अगर बम फटने के बाद चांद के छोटे-छोटे टुकड़े धरती की तरफ फेंके गए, तो इसका इंसानों और प्रकृति पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इसी वजह से मिशन को सीक्रेट रखा गया और इसे कभी पूरा नहीं किया गया।
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