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Science : जानिए होली पर दिखने वाले चांद का रंग 'खूनी लाल' क्यों होगा

Sarita
12 March 2025 10:05 AM IST
Science : जानिए होली पर दिखने वाले चांद का रंग खूनी लाल क्यों होगा
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Science : होली का त्योहार रंगों और खुशियों का प्रतीक है, लेकिन इस बार यह और भी खास होने वाला है. 14 मार्च को जब आप आसमान की ओर देखेंगे, तो एक अनोखा नज़ारा देखने को मिलेगा-चांद लाल रंग में बदलता हुआ दिखाई देगा|
यह नजारा पूर्ण चंद्रग्रहण के कारण होगा, जिसे ब्लड मून के नाम से भी जाना जाता है. इस खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा धीरे-धीरे एक गहरे लाल या तांबे के रंग में बदल जाएगा. आइए, समझते हैं कि यह क्यों होता है?
कैसे और क्यों होता है चंद्रग्रहण?
चंद्रग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक लाइन में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा को ढक लेती है. पूर्ण चंद्रग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया के सबसे गहरे हिस्से (उम्ब्रा) में आ जाता है. इस दौरान सूर्य की रोशनी सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती, जिससे वह कुछ समय के लिए पूरी तरह अंधकारमय दिखता है. लेकिन यह पूरी तरह काला नहीं होता बल्कि चंद्रमा लालिमा लिए हुए नजर आता है. यह रंग पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरने वाली सूर्य की किरणों के कारण बनता है| ब्लड मून: चंद्रमा लाल क्यों दिखता है?
जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में होता है, तो सीधी सूर्य की रोशनी उस तक नहीं पहुंचती. लेकिन पृथ्वी का वातावरण सूर्य की रोशनी को मोड़कर (रिफ्रैक्ट करके) चंद्रमा तक पहुंचाता है. इस दौरान, वातावरण नीली रोशनी को बिखेर देता है और केवल लाल और नारंगी रंग की रोशनी को गुजरने देता है. यही कारण है कि चंद्रमा एक गहरे लाल रंग में दिखता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है|
अगर इस दौरान वातावरण में धूल, धुआं या ज्वालामुखी से निकले कण अधिक होंगे, तो चंद्रमा और भी गहरे लाल या तांबे के रंग का दिख सकता है. नासा के अनुसार, यह प्रभाव वैसा ही होता है जैसे पूरी पृथ्वी के सूर्योदय और सूर्यास्त की रोशनी चंद्रमा पर पड़ रही हो|
किन देशों में दिखेगा यह चंद्रग्रहण?
यह पूर्ण चंद्रग्रहण विशेष रूप से पश्चिमी गोलार्ध के देशों अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में साफ तौर पर दिखाई देगा. भारत में यह पूरी तरह नहीं दिखेगा, लेकिन अगर मौसम साफ हो, तो इसका आंशिक प्रभाव देखा जा सकता है|
मार्च की पूर्णिमा का नाम वर्म मून क्यों?
मार्च की पूर्णिमा को वर्म मून (Worm Moon) कहा जाता है. इस नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी छिपी है. ऐसा माना जाता है कि इस समय धरती गर्म होने लगती है और मिट्टी से कीड़े-मकोड़े बाहर आने लगते हैं. अमेरिका के कुछ आदिवासी समुदायों के अनुसार, यह नाम प्रकृति में बदलाव को दर्शाता है. इसके अलावा, इस पूर्णिमा को अलग-अलग संस्कृतियों में अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे ईगल मून, गूज़ मून, क्रो कम्स बैक मून, शुगर मून और विंड स्ट्रॉन्ग मून|
ब्लड वर्म मून के दौरान और क्या दिखेगा?
अगर इस रात आसमान में हल्की नमी होगी, तो आप एक अनोखा ‘मूनबो’ (Moonbow) भी देख सकते हैं. यह इंद्रधनुष की तरह होता है, लेकिन यह सूर्य की बजाय चंद्रमा की रोशनी से बनता है. इसके अलावा, जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में होगा, तो उसकी चमक कम हो जाएगी, इससे सितारों और ग्रहों को देखने का बेहतरीन अवसर मिलेगा. अगर आप पश्चिमी दिशा में देखेंगे, तो आपको बृहस्पति और मंगल चमकते हुए दिखाई देंगे. साथ ही, कई तारामंडल भी साफ दिख सकते हैं|
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