- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- विज्ञान
- /
- Science: जानिए...

x
Science: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में आज एक भयानक बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी। इस घटना में कई लोग मारे गए। सैकड़ों घायल हुए हैं। राहत कार्य ज़ोरों पर चल रहा है। यह इलाका ऊँचे पहाड़ों और चिनाब नदी से घिरा हुआ है, जिसकी भौगोलिक स्थिति इसे ख़तरनाक बनाती है।
बादल फटने की घटना: क्या हुआ?
14 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच किश्तवाड़ ज़िले के चशोती और पद्दार तशोती इलाके में बादल फटने की घटना हुई। यह इलाका मचैल माता यात्रा के रास्ते में है, जहाँ इन दिनों सैकड़ों तीर्थयात्री जमा थे। अचानक हुई भारी बारिश के कारण पहाड़ों से पानी तेज़ी से नीचे बहकर चिनाब नदी में मिल गया, जिससे बाढ़ आ गई। इस बाढ़ में एक लंगर (सामुदायिक रसोई) और कई घर बह गए। 40 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। 120 से ज़्यादा घायल हैं। कई लोग मलबे में फँसे हुए हैं।
भौगोलिक स्थिति: यह दुर्घटना कहाँ हुई?
स्थान: चशोती, किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर है और मचैल माता मंदिर के रास्ते में पहला मोटर-योग्य गाँव है। यह स्थान पद्दार घाटी में है, जो 14-15 किलोमीटर अंदर है।
ऊँचाई: इस क्षेत्र के पहाड़ 1,818 मीटर से लेकर 3,888 मीटर तक ऊँचे हैं। इतनी ऊँचाई पर ग्लेशियर (बर्फ की चादरें) और ढलान हैं, जो पानी के प्रवाह को तेज़ करते हैं।
चिनाब नदी: यह नदी किश्तवाड़ से होकर बहती है और पहाड़ों से आने वाले पानी को इकट्ठा करती है। बादल फटने के कारण इसका जल स्तर अचानक बढ़ गया।
दुर्गम भूभाग: पहाड़ी रास्ते, गहरी खाइयाँ और बर्फीली ढलानें इस स्थान तक पहुँचना मुश्किल बना देती हैं।
भूगोल इस स्थान को खतरनाक क्यों बनाता है?
ऊँचाई और ग्लेशियर: 1,818 से 3,888 मीटर की ऊँचाई वाले पहाड़ों पर बर्फ जमा होती है। बारिश के कारण यह पिघल जाता है और पानी का बहाव तेज़ हो जाता है।
चिनाब नदी का प्रवाह: यह नदी पहले से ही तेज़ बहती है। बादल फटने के कारण इसका जलस्तर इतना बढ़ गया कि यह नियंत्रण से बाहर हो गया।
दुर्गमता: 90 किलोमीटर की दूरी और पहाड़ी रास्तों के कारण राहत पहुँचाना मुश्किल है।
जलवायु परिवर्तन: विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा के कारण बादल फटने की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
नुकसान और प्रभाव
यात्रा रोकी गई: मचैल माता यात्रा को तुरंत रोक दिया गया ताकि आगे कोई खतरा न हो।
राहत चुनौती: पहाड़ी इलाका होने के कारण बचाव कार्य में देरी हो रही है।
राहत एवं बचाव कार्य
एनडीआरएफ और सेना: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और सेना की टीमें मौके पर पहुँच गईं। वे मलबे से लोगों को निकालने में लगी हुई हैं।
हेलीकॉप्टर और ड्रोन: ऊँचाई वाले इलाकों में मदद पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रशासन: किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज शर्मा और पुलिस स्वयं मौके पर मौजूद हैं। राहत सामग्री और डॉक्टरों की टीमें भेज दी गई हैं।
नेताओं का समर्थन: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना पर दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राहत और बचाव का आश्वासन दिया।
भविष्य के लिए क्या किया जाना चाहिए?
यह घटना दर्शाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में सावधानी ज़रूरी है। सरकार को बेहतर मौसम चेतावनी प्रणाली बनानी चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों पर नज़र रखनी चाहिए। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की योजना बनानी चाहिए।
TagsScienceकिश्तवाड़कहानीबाढ़तबाहीScienceKishtwarStoryFloodDestruction जनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





