विज्ञान

दुनियां के इस देश में साइंस और साइंटिस्टों पर सबसे ज्यादा लोगों का भरोसा...जानें क्यों

Gulabi
5 Oct 2020 9:47 AM GMT
दुनियां के इस देश में साइंस और साइंटिस्टों पर सबसे ज्यादा लोगों का भरोसा...जानें क्यों
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कोरोना वायरस संक्रमण के बाद से दुनियाभर के देश विज्ञान और शोध को लेकर ज्यादा गंभीर हुए.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। कोरोना वायरस संक्रमण के बाद से दुनियाभर के देश विज्ञान और शोध को लेकर ज्यादा गंभीर हुए. बता दें कि वायरस के बारे में अब तक देशों के पास कोई खास जानकारी नहीं है और अक्सर नए-नए खुलासे हो रहे हैं. यही वजह है कि विकसित देश अब रिसर्च पर ध्यान दे रहे हैं. वैसे ये जानकार आप चौंक जाएंगे कि भारत के लोगों को वैज्ञानिकों की बात पर सबसे ज्यादा भरोसा है. इसका खुलासा खुद अमेरिकी संस्था प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) ने किया. वहीं उत्तर कोरिया की सबसे कम आबादी वैज्ञानिकों को महत्व देती है. जानिए, वैज्ञानिकों पर भरोसे के मामले में कौन सा देश किस पायदान पर है.




2/ 8 भारत के लोग कथित तौर पर कम-अनुशासित माने जाते हैं, हालांकि वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की बात पर उनका भरोसा दूसरे देशों से कहीं ज्यादा है. प्यू के मुताबिक यहां की लगभग 59 प्रतिशत आबादी वैज्ञानिकों की बात पर पूरा भरोसा करती है. केवल 5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें एक्सपर्ट्स पर यकीन नहीं.





भारत के लोग कथित तौर पर कम-अनुशासित माने जाते हैं, हालांकि वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की बात पर उनका भरोसा दूसरे देशों से कहीं ज्यादा है. प्यू के मुताबिक यहां की लगभग 59 प्रतिशत आबादी वैज्ञानिकों की बात पर पूरा भरोसा करती है. केवल 5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें एक्सपर्ट्स पर यकीन नहीं.



भारत के लोग कथित तौर पर कम-अनुशासित माने जाते हैं, हालांकि वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की बात पर उनका भरोसा दूसरे देशों से कहीं ज्यादा है. प्यू के मुताबिक यहां की लगभग 59 प्रतिशत आबादी वैज्ञानिकों की बात पर पूरा भरोसा करती है. केवल 5 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें एक्सपर्ट्स पर यकीन नहीं






3/ 8 भारत की तुलना में मॉडर्न कहे जाने वाली अमेरिकी विज्ञान पर उतना भरोसा करते नहीं दिख रहे. रिसर्च के अनुसार लगभग 38 प्रतिशत अमेरिकी आबादी वैज्ञानिकों पर भरोसा जताती है, जबकि 21 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें विज्ञान या वैज्ञानिकों पर कतई यकीन नहीं.

भारत की तुलना में मॉडर्न कहे जाने वाली अमेरिकी विज्ञान पर उतना भरोसा करते नहीं दिख रहे. रिसर्च के अनुसार लगभग 38 प्रतिशत अमेरिकी आबादी वैज्ञानिकों पर भरोसा जताती है, जबकि 21 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें विज्ञान या वैज्ञानिकों पर कतई यकीन नहीं.

भारत की तुलना में मॉडर्न कहे जाने वाली अमेरिकी विज्ञान पर उतना भरोसा करते नहीं दिख रहे. रिसर्च के अनुसार लगभग 38 प्रतिशत अमेरिकी आबादी वैज्ञानिकों पर भरोसा जताती है, जबकि 21 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्हें विज्ञान या वैज्ञानिकों पर कतई यकीन नहीं.

4/ 8 अनुशासन और तकनीक के मामले में काफी आगे खड़े रहने वाला देश जापान भी वैज्ञानिकों पर खास भरोसा नहीं करता. वहां के 23 प्रतिशत लोग ही एक्सपर्ट्स की बात मानते हैं, जबकि 12 प्रतिशत लोगों को बिल्कुल यकीन नहीं. वहीं 57 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो बीच की श्रेणी में हैं यानी कभी तो भरोसा जताते हैं, कभी बिल्कुल नहीं. सांकेतिक फोटो (Pixabay) अनुशासन और तकनीक के मामले में काफी आगे खड़े रहने वाला देश जापान भी वैज्ञानिकों पर खास भरोसा नहीं करता. वहां के 23 प्रतिशत लोग ही एक्सपर्ट्स की बात मानते हैं, जबकि 12 प्रतिशत लोगों को बिल्कुल यकीन नहीं. वहीं 57 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो बीच की श्रेणी में हैं यानी कभी तो भरोसा जताते हैं, कभी बिल्कुल नहीं.

अनुशासन और तकनीक के मामले में काफी आगे खड़े रहने वाला देश जापान भी वैज्ञानिकों पर खास भरोसा नहीं करता. वहां के 23 प्रतिशत लोग ही एक्सपर्ट्स की बात मानते हैं, जबकि 12 प्रतिशत लोगों को बिल्कुल यकीन नहीं. वहीं 57 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो बीच की श्रेणी में हैं यानी कभी तो भरोसा जताते हैं, कभी बिल्कुल नहीं.




5/ 8 अब बात करते हैं उत्तर कोरिया की. तो दुनियाभर से कटा ये रहस्यमयी देश 20 देशों की श्रेणी में सबसे निचले पायदान पर है. यहां 14 प्रतिशत के लगभग लोग ही वैज्ञानिकों पर यकीन करते हैं, जबकि 23 प्रतिशत को एकदम भरोसा नहीं है. इसके साथ

अब बात करते हैं उत्तर कोरिया की. तो दुनियाभर से कटा ये रहस्यमयी देश 20 देशों की श्रेणी में सबसे निचले पायदान पर है. यहां 14 प्रतिशत के लगभग लोग ही वैज्ञानिकों पर यकीन करते हैं, जबकि 23 प्रतिशत को एकदम भरोसा नहीं है. इसके साथ सबसे बड़ा वर्ग यानी 57 प्रतिशत उन लोगों का है जो खास यकीन नहीं जताते हैं.

अब बात करते हैं उत्तर कोरिया की. तो दुनियाभर से कटा ये रहस्यमयी देश 20 देशों की श्रेणी में सबसे निचले पायदान पर है. यहां 14 प्रतिशत के लगभग लोग ही वैज्ञानिकों पर यकीन करते हैं, जबकि 23 प्रतिशत को एकदम भरोसा नहीं है. इसके साथ सबसे बड़ा वर्ग यानी 57 प्रतिशत उन लोगों का है जो खास यकीन नहीं जताते हैं.

6/ 8 विज्ञान के नाम पर उत्तर कोरिया में मिसाइलें और परमाणु हथियार बनाने पर ज्यादा जोर दिया जाता रहा है. देश के पास हर तरह का परमाणु हथियार है, जो छोटी से लेकर लंबी दूरी तक वार कर सकता है. उसके पास असीमित संख्या में रॉकेट लॉन्चर भी हैं.

विज्ञान के नाम पर उत्तर कोरिया में मिसाइलें और परमाणु हथियार बनाने पर ज्यादा जोर दिया जाता रहा है. देश के पास हर तरह का परमाणु हथियार है, जो छोटी से लेकर लंबी दूरी तक वार कर सकता है. उसके पास असीमित संख्या में रॉकेट लॉन्चर भी हैं.

विज्ञान के नाम पर उत्तर कोरिया में मिसाइलें और परमाणु हथियार बनाने पर ज्यादा जोर दिया जाता रहा है. देश के पास हर तरह का परमाणु हथियार है, जो छोटी से लेकर लंबी दूरी तक वार कर सकता है. उसके पास असीमित संख्या में रॉकेट लॉन्चर भी हैं.

7/ 8 उत्तर कोरिया में विज्ञान पढ़ने वालों को पूरी दुनिया की बजाए अपने देश और किम परिवार के लिए खोज की बात कही जाती है. यहां तक कि अगर कोई वैज्ञानिक बड़ी खोज करे तो उसे सामने लाते हुए वैज्ञानिक को सुप्रीम लीडर्स को अपनी प्रेरणा कहना होता है. द आउटलाइन के मुताबिक वहां केवल उन्हीं रिसर्च को प्रमोट किया जाता है, जो बम-मिसाइल पर काम करें या फिर खुद को युवा दिखाने पर कोई प्रयोग हो. ये प्रयोग सीधे किम परिवार के पास जाते हैं.

उत्तर कोरिया में विज्ञान पढ़ने वालों को पूरी दुनिया की बजाए अपने देश और किम परिवार के लिए खोज की बात कही जाती है. यहां तक कि अगर कोई वैज्ञानिक बड़ी खोज करे तो उसे सामने लाते हुए वैज्ञानिक को सुप्रीम लीडर्स को अपनी प्रेरणा कहना होता है. द आउटलाइन के मुताबिक वहां केवल उन्हीं रिसर्च को प्रमोट किया जाता है, जो बम-मिसाइल पर काम करें या फिर खुद को युवा दिखाने पर कोई प्रयोग हो. ये प्रयोग सीधे किम परिवार के पास जाते हैं.

उत्तर कोरिया में विज्ञान पढ़ने वालों को पूरी दुनिया की बजाए अपने देश और किम परिवार के लिए खोज की बात कही जाती है. यहां तक कि अगर कोई वैज्ञानिक बड़ी खोज करे तो उसे सामने लाते हुए वैज्ञानिक को सुप्रीम लीडर्स को अपनी प्रेरणा कहना होता है. द आउटलाइन के मुताबिक वहां केवल उन्हीं रिसर्च को प्रमोट किया जाता है, जो बम-मिसाइल पर काम करें या फिर खुद को युवा दिखाने पर कोई प्रयोग हो. ये प्रयोग सीधे किम परिवार के पास जाते हैं.

8/ 8 महाशक्ति अमेरिका अपने यहां रिसर्च पर उतने पैसे नहीं लगा रहा, जितना यूरोपियन देश स्पेन लगा रहा है. स्पेन में विज्ञान से जुड़े शोध पर सबसे ज्यादा खर्च किया जाता है. यहां पर पब्लिक R&D के तहत सरकारी फंडिंग होती है ताकि विज्ञान, जिसमें मेडिकल साइंस भी शामिल है, पर नए-नए शोध हो सकें. स्पेन की सरकार से लेकर बड़ी आबादी मानती है कि साइंस से जुड़ी उपलब्धियों में उनके देश को नंबर 1 होना चाहिए. वहीं रिसर्च के मामले में कहीं पीछे खड़े अमेरिका और ब्रिटेन की वैज्ञानिक खोजें दुनिया के लिए सबसे अहम साबित हुई हैं.

हां रिसर्च पर उतने पैसे नहीं लगा रहा, जितना यूरोपियन देश स्पेन लगा रहा है. स्पेन में विज्ञान से जुड़े शोध पर सबसे ज्यादा खर्च किया जाता है. यहां पर पब्लिक R&D के तहत सरकारी फंडिंग होती है ताकि विज्ञान, जिसमें मेडिकल साइंस भी शामिल है, पर नए-नए शोध हो सकें. स्पेन की सरकार से लेकर बड़ी आबादी मानती है कि साइंस से जुड़ी उपलब्धियों में उनके देश को नंबर 1 होना चाहिए. वहीं रिसर्च के मामले में कहीं पीछे खड़े अमेरिका और ब्रिटेन की वैज्ञानिक खोजें दुनिया के लिए सबसे अहम साबित हुई हैं.

महाशक्ति अमेरिका अपने यहां रिसर्च पर उतने पैसे नहीं लगा रहा, जितना यूरोपियन देश स्पेन लगा रहा है. स्पेन में विज्ञान से जुड़े शोध पर सबसे ज्यादा खर्च किया जाता है. यहां पर पब्लिक R&D के तहत सरकारी फंडिंग होती है ताकि विज्ञान, जिसमें मेडिकल साइंस भी शामिल है, पर नए-नए शोध हो सकें. स्पेन की सरकार से लेकर बड़ी आबादी मानती है कि साइंस से जुड़ी उपलब्धियों में उनके देश को नंबर 1 होना चाहिए. वहीं रिसर्च के मामले में कहीं पीछे खड़े अमेरिका और ब्रिटेन की वैज्ञानिक खोजें दुनिया के लिए सबसे अहम साबित हुई हैं.

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