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Science: एरिजोना यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च स्टडी ने जीवन की उत्पत्ति के बारे में लंबे समय से चली आ रही मान्यताओं को चुनौती दी है। वैज्ञानिकों का पहले मानना था कि जीवन के लिए ज़रूरी अमीनो एसिड एक खास और पहले से तय तरीके से बनते थे। हालांकि, नई खोज से पता चलता है कि यह पुरानी समझ गलत हो सकती है। वैज्ञानिकों का अब मानना है कि उन्होंने शुरू से ही इन अमीनो एसिड के महत्व को गलत समझा होगा। जीवन की उत्पत्ति उतनी सरल नहीं थी जितनी पहले सोची जाती थी।
रिसर्च में क्या खास था?
जोआना मैसेल और सॉसन वेहबी के नेतृत्व में इस नई रिसर्च ने पिछली धारणाओं को पूरी तरह से पलट दिया है। वैज्ञानिकों ने पहले सोचा था कि अमीनो एसिड एक खास क्रम या तरीके से बनते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। उनका बनना उतना सीधा नहीं था जितना पहले माना जाता था।
वैज्ञानिकों ने रिसर्च कैसे की?
रिसर्च टीम ने 4 अरब साल पहले के प्रोटीन की संरचना की जांच करने के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और डेटा का इस्तेमाल किया। ये वही शुरुआती कण हैं जिनसे पृथ्वी पर हर जीवित जीव की उत्पत्ति हुई है। पहले माना जाता था कि जीवन की शुरुआत पूरी दुनिया में एक जैसे माहौल में हुई थी। लेकिन अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अलग-अलग अमीनो एसिड पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों और अलग-अलग माहौल में बने होंगे।
रिसर्च से क्या पता चला?
इस रिसर्च की सबसे हैरान करने वाली बात ट्रिप्टोफैन नाम के अमीनो एसिड के बारे में है। वैज्ञानिकों का मानना था कि ट्रिप्टोफैन बनने वाले आखिरी अमीनो एसिड में से एक था, जिसका मतलब है कि यह जीवन की उत्पत्ति में बहुत बाद में दिखाई दिया। रिसर्च में पाया गया कि यह अमीनो एसिड हमारे सबसे शुरुआती सामान्य पूर्वज LUCA के समय भी काफी मात्रा में मौजूद था।
शुरुआती चरणों में जीवन का जेनेटिक कोड शायद आज के मुकाबले बहुत अलग था। उस समय, अणुओं के बीच एक तरह की होड़ थी। अलग-अलग सिस्टम विकास को अलग-अलग दिशाओं में ले जाने की कोशिश कर रहे थे। यही वजह है कि ट्रिप्टोफैन जैसे कुछ अमीनो एसिड उम्मीद से बहुत पहले बन गए।
इस जानकारी का क्या फायदा होगा? अगर पृथ्वी पर जीवन सिर्फ एक खास जगह के बजाय अलग-अलग माहौल में शुरू हो सकता था, तो यह मुमकिन है कि यह अंतरिक्ष में दूसरे ग्रहों पर भी शुरू हुआ हो। वैज्ञानिक अब समझते हैं कि जीवन के लिए सिर्फ एक खास तरह के माहौल की ज़रूरत नहीं होती। इससे हमारे सौर मंडल के दूसरे ग्रहों पर जीवन की खोज पहले से कहीं ज़्यादा मुमकिन और उम्मीद भरी लगती है।
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