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Science: एक बल्ब ने खोल दिया विज्ञान का बड़ा राज

Sarita
27 Jan 2026 8:23 AM IST
Science:  एक बल्ब ने खोल दिया विज्ञान का बड़ा राज
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Science: ज़रा सोचिए, एक ऐसा मटेरियल जो स्टील से 200 गुना ज़्यादा मज़बूत और कागज़ से भी पतला हो, जिसे पहली बार 2004 में खोजा गया और इसके खोजने वालों को नोबेल पुरस्कार मिला – फिर भी इसे 147 साल पहले थॉमस एडिसन की लैब में अनजाने में बनाया गया था? हाँ, आपने सही पढ़ा। ग्रेफीन, जिसे "चमत्कारी मटेरियल" कहा जाता है, के बारे में ऐसी खबर सामने आई है जिसने वैज्ञानिक दुनिया को हैरान कर दिया है। राइस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि एडिसन का 1879 का लाइट बल्ब न सिर्फ़ दुनिया को रोशन करता था, बल्कि अनजाने में भविष्य का सबसे क्रांतिकारी मटेरियल भी बना रहा था। आइए आज के आर्टिकल में एडिसन के बल्ब और इस जादुई 21वीं सदी के मटेरियल के बीच के रहस्यमयी कनेक्शन को जानें...
विज्ञान की दुनिया में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का दावा है कि जब वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने 1879 में अपना पहला लाइट बल्ब बनाया था, तो उन्होंने अनजाने में ग्रेफीन बनाया था। यह वही मटेरियल है जिसे आज दुनिया का सबसे मज़बूत और सबसे पतला मटेरियल माना जाता है।
ACS नैनो की एक रिपोर्ट के अनुसार, राइस यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री और नैनोइंजीनियरिंग के प्रोफेसर जेम्स टूर के नेतृत्व में रिसर्चर्स की एक टीम ने एडिसन के 19वीं सदी के बल्ब डिज़ाइन को एडवांस्ड टूल्स का इस्तेमाल करके फिर से बनाया। टीम ने एडिसन के ओरिजिनल पेटेंट पर आधारित कार्बन-फिलामेंट बल्ब का इस्तेमाल किया।
जब वैज्ञानिकों ने इन बल्बों में 110 वोल्ट का करंट पास किया, तो फिलामेंट तेज़ी से गर्म हो गया। इस प्रक्रिया को आधुनिक विज्ञान में फ्लैश जूल हीटिंग के नाम से जाना जाता है। जांच में पता चला कि गर्मी के कारण फिलामेंट का ऊपरी हिस्सा टर्बोस्ट्रेट्रिक ग्रेफीन में बदल गया था। यह एक तरह का ग्रेफीन है जिसका इस्तेमाल आज बैटरी और सुपरमटेरियल बनाने में किया जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्रेफीन को आधिकारिक तौर पर दुनिया में पहली बार 2004 में मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने खोजा था। उन्हें इस खोज के लिए 2010 में नोबेल पुरस्कार भी मिला था। लेकिन नई रिसर्च से पता चलता है कि इसे 140 साल पहले ही एडिसन की लैब में बनाया जा चुका था। राइस यूनिवर्सिटी के रिसर्चर लुकास एडी के अनुसार, एडिसन के प्रयोगों में छिपी यह जानकारी हमें भविष्य की रिसर्च के लिए प्रेरित करती है।
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