विज्ञान

रिसर्च का दावा- दुनिया के सबसे छोटे बंदर पिग्मी मार्मोसेट का वजन होता है मात्र 100 ग्राम

Gulabi
4 Jun 2021 5:47 AM GMT
रिसर्च का दावा- दुनिया के सबसे छोटे बंदर पिग्मी मार्मोसेट का वजन होता है मात्र 100 ग्राम
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अमेरिका के जीव विज्ञानियों ने दुनिया के सबसे छोटे बंदर पिग्मी मार्मोसेट पर किए गए एक रिसर्च के बाद बड़ा दावा किया है

वॉशिंगटन: अमेरिका के जीव विज्ञानियों ने दुनिया के सबसे छोटे बंदर पिग्मी मार्मोसेट पर किए गए एक रिसर्च के बाद बड़ा दावा किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बंदर दो अलग-अलग प्रजातियों से मिलकर बना हुआ है। ऐसे में इस बंदर के अंदर उन दोनों प्रजातियों के गुण मौजूद हैं। बता दें कि एक वयस्क पिग्मी मार्मोसेट बंदर का वजन मात्र 100 ग्राम ही होता है। ये बंदर दक्षिण अमेरिका के वर्षावनों में पाए जाते हैं।

दो अलग-अलग प्रजातियों से मिला संबंध
अमेरिकन जर्नल ऑफ फिजिकल एंथ्रोपोलॉजी में प्रकाशित शोध में इस बंदर की खोपड़ी की संरचना और डीएनए इस बाद की पुष्टि करता है कि ये दो अलग-अलग प्रजातियों से संबंधित हैं। इस स्टडी की मुख्य लेखिका और नॉर्दर्न इलिनोइस जैविक मानवविज्ञानी लीला पोर्टर ने कहा कि हमारे अध्ययन से पता चला है कि इन दो प्रजातियों में फर के रंग से अंतर नहीं किया जा सकता है, लेकिन वे अपने माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए और खोपड़ी की संरचना के अंतर से अलग-अलग हैं।
फर के रंग को लेकर अंतर को शोधकर्ताओं ने किया खारिज
इससे पहले के अध्ययन में इस बंदर के फर के रंग को लेकर अंतर बताया गया था। हालांकि, नए शोध में रंग वाले अंतर को नकार दिया गया है। इस टीम ने कहा कि बंदर के फर का रंग अत्याधिक परिवर्तनशील लग रहा है। ऐसे में किसी एक क्षेत्र में रहने वाले पिग्मी मार्मोसेट बंदरों का रंग भी अलग हो सकता है। पोर्टर ने कहा कि उनकी खोपड़ी की संरचना की तुलना से पता चलता है कि उनके खाना ढूंढने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं।
मात्र 100 ग्राम होता है इनका वजन
पिग्मी मार्मोसेट बंदरों का वजन वयस्क होने के दौरान मात्र 100 ग्राम होता है। ये बंदर दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित अमेजन वर्षावन में पाए जाते हैं। इन शोधकर्ताओं ने अपने रिसर्च के लिए दक्षिण अमेरिका के कम से कम 13 जगहों से इस बंदर के सैंपल इकट्ठा किए थे। इनमें इक्वाडोर और पेरू के भी इलाके शामिल थे। इन बंदरों को पहले 'पूर्वी' और 'पश्चिमी' पिग्मी मार्मोसेट के रूप में जाना जाता था, लेकिन पोर्टर की टीम की सिफारिश है कि उन्हें अधिक सटीकता के लिए 'उत्तर-पश्चिमी' और 'दक्षिणी' के नाम से फिर से वर्गीकृत किया जाए।
छह इंच से बड़ा नहीं होता इनका शरीर
इस टीम ने पिग्मी मार्मोसेट बंदर की जिन दो प्रजातियों के साथ संबंध का पता लगाया है, उनके वैज्ञानिक नाम सेबुएला पाइग्मिया और सेबुएला निवेवेंट्रिस दिया जाएगा। ये बंदर समूहों में रहते हैं, जिनमें मादा बच्चे को जन्म देती है, जबकि नर उनकी देखभाल करता है। पूरा बढ़ने के बावजूद उनके शरीर की लंबाई मात्र छह इंच ही होती है।
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