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ISRO Chandrayaan 3: जर्मनी में रहने वाले एक भारतीय वैज्ञानिक ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन की चंद्र लैंडिंग साइट, जिसे शिव शक्ति पॉइंट के नाम से जाना जाता है, का एक शानदार 3D मैप बनाया है। उन्होंने यह मैप इंटरनेट पर मौजूद पब्लिकली उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल करके बनाया है। यह दिखाता है कि कोई भी व्यक्ति चंद्रमा की सतह को बेहतर ढंग से समझने के लिए ओपन डेटा का इस्तेमाल कैसे कर सकता है। चंद्र थुंगाथुरथी ने यह मैप बनाने के लिए चंद्रयान-2 कैमरे द्वारा ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया।
तस्वीरों से क्या पता चला?
नया 3D मैप चंद्रमा की सतह को बहुत डिटेल में दिखाता है। यह इतना सटीक है कि इससे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास के इलाके के हर कोने की बारीकी से जांच की जा सकती है। इसका मतलब है कि तस्वीरें बहुत साफ और हाई क्वालिटी की हैं। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई, 2023 को श्रीहरिकोटा से LVM3 रॉकेट का इस्तेमाल करके लॉन्च किया गया था।
चंद्रयान-3 की खोजें
वैज्ञानिक थुंगाथुरथी ने बताया कि चंद्रमा की एक साधारण तस्वीर की तुलना में 3D मैप विज्ञान के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण है। जबकि एक तस्वीर सिर्फ़ यह दिखाती है कि चंद्रमा की सतह ऊपर से कैसी दिखती है, 3D मैप असल टोपोग्राफी दिखाता है, जिसमें गड्ढों की गहराई, ढलान और चट्टानों की ऊंचाई शामिल है।
चंद्रमा का 3D मैप कैसे बनाया गया?
जब चंद्रयान-2 चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा था, तो उसने एक ही जगह की अलग-अलग एंगल से तस्वीरें लीं। एक ऑर्बिट के दौरान, कैमरा दूसरे ऑर्बिट की तुलना में थोड़े अलग एंगल पर झुका हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप उसी इलाके की कई तिरछी तस्वीरें मिलीं। वैज्ञानिकों ने एक खास तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जिसने इन तस्वीरों को मिलाकर चंद्रमा की सतह का 3D मैप बनाया।
यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?
इस खोज से भारत के भविष्य के चंद्र मिशनों को फायदा होगा। भारत अब चंद्रयान-4 की तैयारी कर रहा है, जिसका मकसद चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के सैंपल इकट्ठा करके उन्हें वापस पृथ्वी पर लाना है। यह एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम है, और इसकी सफलता के लिए चंद्रमा की सतह की पूरी समझ बहुत ज़रूरी है। 3D मैप कैसे मदद करेगा? यह वैज्ञानिकों को यह देखने में मदद करेगा कि चंद्रमा की सतह सच में सपाट है या नहीं। यह मैप 30 सेंटीमीटर जितनी छोटी चट्टानों या पत्थरों को भी दिखा सकता है, जो लैंडिंग के दौरान खतरा पैदा कर सकते हैं। यह ज़मीन की ढलान का पता लगाएगा, और अगर ढलान ज़्यादा तेज़ हुई, तो लैंडर उतरते समय पलट सकता है। इसलिए, यह मैप सुरक्षित लैंडिंग पक्का करने में मदद करेगा।
यह मैप यह तय करने में भी मदद करता है कि लैंडिंग साइट से सैंपल इकट्ठा करने की जगह तक का रास्ता सुरक्षित है या नहीं। इससे रोवर गड्ढों या चट्टानों के बीच फंसने से बच जाएगा। जैसे-जैसे भारत चांद पर और भी बड़े मिशन भेजेगा, ऐसे डिटेल्ड मैप बहुत कीमती हो जाएंगे। वे स्पेसक्राफ्ट को सुरक्षित रूप से उतारने और पूरे मिशन को असरदार तरीके से प्लान करने में बहुत मदद करेंगे।
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