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नहीं मिलेगा पूजा का फल सावन पूर्णिमा पर इन कामों से बचें

Religion धर्म : हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना गया है और सावन महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने, पवित्र नदी में स्नान तथा दान-पुण्य करने का विधान है। सावन पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाता है। इस कारण इस तिथि का धार्मिक और पारिवारिक दोनों दृष्टि से विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। वहीं धार्मिक परंपराओं में कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं, जिनसे पूर्णिमा के दिन बचने की सलाह दी जाती है।
सावन पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान किया जाता है और ऐसा संभव न होने पर घर पर ही स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करने की धार्मिक परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार व्रत भी रखते हैं। हालांकि पूजा के साथ व्यवहार और खानपान में संयम रखना भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
मान्यताओं के मुताबिक सावन पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन से बचना चाहिए। इस दिन मांस-मदिरा के सेवन को वर्जित माना जाता है। कई परिवार प्याज और लहसुन से भी परहेज करते हुए सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार या अपने पारिवारिक नियमों के अनुसार भोजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पूजा और व्रत के दौरान शरीर के साथ मन की शुद्धता और संयम भी बनाए रखना चाहिए।
इस दिन किसी व्यक्ति के प्रति अपशब्दों का प्रयोग, क्रोध या विवाद करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। पूर्णिमा को पूजा-पाठ, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए घर में कलह या किसी के साथ अनावश्यक विवाद करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि पूजा का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड करना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में भी सकारात्मकता और शांति लाना है।
सावन पूर्णिमा पर किसी गरीब, जरूरतमंद या घर के दरवाजे पर मदद मांगने आए व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। हिंदू धार्मिक परंपराओं में पूर्णिमा के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल या धन का दान किया जा सकता है। गाय को भोजन कराने और जरूरतमंद लोगों को भोजन देने की भी परंपरा है। हालांकि दान हमेशा अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार ही करना चाहिए।
सावन पूर्णिमा के दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को स्वच्छता प्रिय मानी गई हैं। ऐसे में पूजा से पहले पूजा घर को साफ करना और पूजा सामग्री को व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है। खंडित मूर्तियों या खराब पूजा सामग्री का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है। भगवान को अर्पित किए जाने वाले फल और प्रसाद भी साफ और ताजे होने चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन पूर्णिमा पर किसी बुजुर्ग, माता-पिता या गुरु का अपमान नहीं करना चाहिए। भारतीय परंपरा में इनका सम्मान महत्वपूर्ण माना गया है। रक्षाबंधन का पर्व भी इसी दिन पड़ने के कारण परिवार में प्रेम, सम्मान और आपसी विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया जाता है। भाई-बहन के बीच पुराने विवाद या नाराजगी को बढ़ाने के बजाय रिश्ते को मजबूत करने का प्रयास करना इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है।
सावन पूर्णिमा के दिन पूजा करते समय मन को इधर-उधर भटकाने या केवल दिखावे के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से किसी भी पूजा में श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। यदि व्रत रखा गया है तो अपनी सेहत और क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही नियमों का पालन करना चाहिए। बीमारी, गर्भावस्था या नियमित दवा लेने जैसी स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
इस दिन पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को अनावश्यक नुकसान पहुंचाने से भी बचने की परंपरा है। सावन का महीना प्रकृति और हरियाली से भी जुड़ा हुआ है। कई श्रद्धालु सावन पूर्णिमा पर पौधे लगाते हैं या पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करते हैं। इसे पुण्य कार्य के रूप में देखा जाता है।
रक्षाबंधन के कारण सावन पूर्णिमा पर राखी बांधने के शुभ समय का भी ध्यान रखा जाता है। परंपरागत ज्योतिषीय मान्यताओं में भद्रा काल के दौरान राखी बांधने से परहेज किया जाता है। इसलिए रक्षाबंधन मनाने वाले परिवार अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि, भद्रा और शुभ मुहूर्त की जानकारी देखकर राखी बांध सकते हैं। अलग-अलग स्थानों पर पंचांग के समय में थोड़ा अंतर संभव है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘इन कामों को करने से पूजा का फल बिल्कुल नहीं मिलेगा’ जैसी बात को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए, इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। सावन पूर्णिमा की परंपराएं श्रद्धा, सात्विकता, दान, संयम और परिवार के प्रति प्रेम का संदेश देती हैं। इसलिए इस दिन नकारात्मक व्यवहार, नशा, तामसिक भोजन, झगड़ा और अपमान से बचते हुए पूजा-पाठ और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है।





