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धर्म-अध्यात्म
योगिनी एकादशी 2026 आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा पुण्य, जानें व्रत का महत्व
nidhi
10 July 2026 10:06 AM IST

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योगिनी एकादशी 2026
Yogini Ekadashi 2026: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है. सनातन परंपरा में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से समस्त पापों का नाश होता है और साधक को सुख, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है. धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत के पुण्य को हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर बताया गया है. साथ ही भगवान शिव और विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होने का भी उल्लेख मिलता है. इस साल कल यानी 11 जुलाई को सूर्योदय के तुरंत बाद तिथि समाप्त हो रही है, इसलिए शास्त्रों के नियमों के अनुसार गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग आज 10 जुलाई, शुक्रवार को ही उपवास रख रहे हैं.
योगिनी एकादशी 2026 की पौराणिक कथा
महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को योगिनी एकादशी की महिमा सुनाई थी. कथा के अनुसार अलकापुरी में कुबेर के लिए पुष्प लाने का कार्य हेममाली नामक सेवक करता था. एक दिन वह अपनी पत्नी के साथ मनोरंजन में इतना व्यस्त हो गया कि समय पर पुष्प नहीं पहुंचा सका. इससे क्रोधित होकर कुबेर ने उसे श्राप दे दिया. श्राप से पीड़ित हेममाली ने ऋषियों के निर्देश पर योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से उसे श्राप से मुक्ति मिल गई.
64 योगिनियों से जुड़ा महत्व
योगिनी एकादशी का संबंध 64 योगिनियों की आराधना से भी माना जाता है. देश के विभिन्न शक्तिपीठों और तांत्रिक साधना केंद्रों में योगिनियों की पूजा का विशेष महत्व है. यह एकादशी आध्यात्मिक शुद्धि और दिव्य कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर मानी जाती है.
व्रत और पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए. श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं. अगले दिन द्वादशी तिथि में ब्राह्मण भोजन एवं दान के बाद व्रत का पारण किया जाता है. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को लोक और परलोक दोनों में कल्याणकारी फल प्राप्त होते हैं.
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