धर्म-अध्यात्म

Yogini Ekadashi 2025:योगिनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम, वरना जीवनभर भुगतना पड़ेगा कष्ट

Sarita
18 Jun 2025 7:55 AM IST
Yogini Ekadashi 2025:योगिनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम, वरना जीवनभर भुगतना पड़ेगा कष्ट
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Yogini Ekadashi 2025: आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है ताकि साधक अपने जीवन में सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति कर सके। योगिनी एकादशी का पालन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
योगिनी एकादशी की तिथि:
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी 21 जून को सुबह 7:18 बजे शुरू होकर 22 जून को सुबह 4:27 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार इस दिन 21 जून को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
योगिनी एकादशी के दिन करें ये कार्य:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
भगवान विष्णु का स्मरण करें और एकादशी व्रत का संकल्प लें।
मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने देसी घी का दीपक जलाएं।
फल, फूल और सात्विक भोजन भगवान को अर्पित करें।
मंत्रों का जाप करें और योगिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें।
पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद बांटें।
तुलसी की पूजा करें, लेकिन तुलसी पर जल चढ़ाएं या छूने से बचें।
तुलसी के पौधे की दूर से परिक्रमा करें और दीपक जलाएं।
योगिनी एकादशी के दिन इन बातों का रखें ध्यान:
चावल और तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल न करें, इससे पुण्य नष्ट हो सकते हैं।
इस दिन किसी से लड़ाई-झगड़ा न करें और न ही मन में बुरे विचार रखें।
काले कपड़े पहनने से बचें।
तुलसी के पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना मना है।
एकादशी के दिन किसी भी तरह की गलत आदत या कर्म से दूर रहें।
योगिनी एकादशी का महत्व:
ब्रह्म विवर्त पुराण में योगिनी एकादशी व्रत की कथा का उल्लेख मिलता है। यह व्रत विशेष रूप से बीमारियों और शारीरिक कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। उत्तर भारतीय हिंदी पंचांग के अनुसार, यह व्रत आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को योगिनी एकादशी के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया था। हिंदू धर्म में
उपवास
को आत्मा को ब्रह्म से जोड़ने का माध्यम माना जाता है। इसलिए नियमों और शास्त्रीय मानदंडों का पालन करते हुए एकादशी व्रत से मिलने वाले आध्यात्मिक और सांसारिक लाभों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस दिन उपवास करने वाले व्यक्ति को विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जिसमें लक्ष्मी पूजा, कुबेर पूजा, कनकधारा पूजा और लक्ष्मी-नारायण पूजा शामिल हैं। यदि किसी को आर्थिक या व्यवसायिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो योगिनी एकादशी के दिन ये पूजा विशेष फलदायक मानी जाती हैं।
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