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Religion, Spirituality ,धर्म अध्यात्म: दुनियाभर में क्रिसमस का नाम लेते ही 25 दिसंबर की तारीख सबसे पहले दिमाग में आती है। अधिकतर देशों में इसी दिन प्रभु यीशु मसीह का जन्मोत्सव मनाया जाता है। लेकिन यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि क्रिसमस हर जगह 25 दिसंबर को ही मनाया जाता है। रूस, यूक्रेन, सर्बिया, जॉर्जिया और कुछ अन्य देशों में क्रिसमस 7 जनवरी को मनाया जाता है। इसके पीछे धर्म, परंपरा और कैलेंडर से जुड़ा एक खास कारण है।
असल में, क्रिसमस की तारीख का यह अंतर कैलेंडर सिस्टम की वजह से पैदा हुआ है। दुनिया के ज्यादातर देश आज जिस कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, उसे ग्रेगोरियन कैलेंडर कहा जाता है। इस कैलेंडर के अनुसार क्रिसमस 25 दिसंबर को पड़ता है। लेकिन रूस और कुछ पूर्वी यूरोपीय देशों में आज भी धार्मिक आयोजनों के लिए जूलियन कैलेंडर का पालन किया जाता है।
जूलियन कैलेंडर की शुरुआत रोमन शासक जूलियस सीजर के समय हुई थी। यह कैलेंडर लंबे समय तक इस्तेमाल में रहा, लेकिन धीरे-धीरे इसमें समय की गणना में अंतर आने लगा। बाद में 16वीं सदी में पोप ग्रेगरी XIII ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया, जिसे अधिक सटीक माना गया। इसके बाद पश्चिमी देशों ने नया कैलेंडर अपना लिया, लेकिन कई ऑर्थोडॉक्स चर्चों ने धार्मिक परंपराओं के लिए जूलियन कैलेंडर को ही बनाए रखा।
आज की तारीख में जूलियन और ग्रेगोरियन कैलेंडर के बीच 13 दिनों का अंतर है। जूलियन कैलेंडर के अनुसार क्रिसमस 25 दिसंबर को ही पड़ता है, लेकिन जब उसे ग्रेगोरियन कैलेंडर में बदला जाता है, तो वही तारीख 7 जनवरी बन जाती है। इसी वजह से रूस, यूक्रेन और सर्बिया जैसे देशों में क्रिसमस 7 जनवरी को मनाया जाता है।
रूस में क्रिसमस का त्योहार मुख्य रूप से रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च से जुड़ा हुआ है। वहां यह दिन धार्मिक रीति-रिवाजों, चर्च में प्रार्थना और पारंपरिक आयोजनों के साथ मनाया जाता है। सोवियत काल के दौरान क्रिसमस पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा जोर नहीं दिया जाता था, लेकिन अब यह फिर से एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व के रूप में मनाया जाता है।
रूस और अन्य ऑर्थोडॉक्स देशों में क्रिसमस से पहले लंबा उपवास भी रखा जाता है, जिसे ‘नेटिविटी फास्ट’ कहा जाता है। यह उपवास 7 जनवरी को क्रिसमस के साथ समाप्त होता है। इस दिन परिवार के लोग एक साथ भोजन करते हैं और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं।
इस तरह, रूस में 7 जनवरी को क्रिसमस मनाने का कारण कोई अलग मान्यता नहीं, बल्कि कैलेंडर का अंतर है। जहां पश्चिमी देश ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार चलते हैं, वहीं कई पूर्वी और ऑर्थोडॉक्स ईसाई समुदाय आज भी जूलियन कैलेंडर के अनुसार अपने
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