धर्म-अध्यात्म

सितंबर की खास एकादशी कब है जानें पूजा विधि और व्रत खोलने का समय

Ratna Netam
18 Sept 2026 2:18 PM IST
सितंबर की खास एकादशी कब है जानें पूजा विधि और व्रत खोलने का समय
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धर्म : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। हर महीने आने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को **परिवर्तिनी एकादशी** कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हुए करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी नाम दिया गया है।साल 2026 में परिवर्तिनी एकादशी की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में असमंजस है कि व्रत 21 सितंबर को रखा जाए या 22 सितंबर को। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात से शुरू होकर 22 सितंबर की रात तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर इस बार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत **22 सितंबर 2026, मंगलवार** को रखना शुभ माना जा रहा है।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 की रात करीब 8 बजे से प्रारंभ होगी और 22 सितंबर 2026 की रात लगभग 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत रखने वाले श्रद्धालु 22 सितंबर को उपवास रख सकते हैं।इस दिन पूजा के लिए कई शुभ योग भी बताए जा रहे हैं। पंचांग के अनुसार रवि योग सुबह के समय रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त में भी भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि
परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा करनी चाहिए।पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।पूजा के दौरान भगवान विष्णु से सुख-शांति, परिवार की खुशहाली और जीवन में सकारात्मक बदलाव की कामना की जाती है।
व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
परिवर्तिनी एकादशी के दिन सात्विक भोजन का पालन किया जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार करके भी व्रत करते हैं। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही व्रत का पालन करना चाहिए।इस दिन चावल, अनाज और तामसिक भोजन से परहेज करने की धार्मिक मान्यता है। भगवान विष्णु की भक्ति में दिन बिताना और जरूरतमंद लोगों को दान देना शुभ माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण का समय
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। व्रत खोलने से पहले भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद फल, जल या सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत पूरा किया जाता है।पारण का सही समय स्थान और पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। भक्तों का विश्वास है कि इस व्रत से मन की शुद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु पूरे नियम और श्रद्धा के साथ व्रत रखकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।अगर आप भी परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं तो 22 सितंबर को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें। भक्ति, संयम और सकारात्मक सोच के साथ किया गया यह व्रत धार्मिक रूप से विशेष फलदायी माना जाता है।
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