धर्म-अध्यात्म

Wedding Card Vastu Tips: शादी के कार्ड में नहीं होनी चाहिए ये चीजें, बनवाते समय न करें ये गलतियां

Sarita
15 Nov 2025 8:01 AM IST
Wedding Card Vastu Tips: शादी के कार्ड में नहीं होनी चाहिए ये चीजें, बनवाते समय न करें ये गलतियां
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Wedding Card Vastu Tips: हिंदू धर्म में विवाह को सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों के मिलन माना जाता है, जो हर किसी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और यादगार क्षण होता है। इस शुभ कार्य की शुरुआत में देवताओं को आमंत्रित करने से की जाती है। शादी का कार्ड बनवाते समय भी कुछ नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए। यदि इन नियमों का पालन न किया जाए तो इसका नकारात्मक प्रभाव जीवन में देखने को मिलता है।
यही वजह है कि ऐसी विवाह निमंत्रण पत्र यानी वेडिंग कार्ड बनवाते समय वास्तु नियमों का ध्यान भी जरूर रखना चाहिए। अगर आपके घर में भी जल्द शादी होने वाली है, तो यह जरूरी है कि आप कुछ विशेष धार्मिक और वास्तु नियमों का पालन करें ताकि विवाह सुचारू रूप से संपन्न हो।
वेडिंग कार्ड पर भूल से भी न छपवाएं ये चीजें:
दूल्हा-दुल्हन की तस्वीर:
आजकल कई लोग कार्ड को आकर्षक बनाने के लिए उस पर दूल्हा-दुल्हन की तस्वीर लगवा लेते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार यह शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से नजर दोष का प्रभाव बढ़ सकता है। साथ ही वैवाहिक जीवन में अनजाने में तनाव या मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
भगवान गणेश की तस्वीर:
अक्सर लोग सोचते हैं कि कार्ड पर भगवान गणेश की छवि छपवाने से शादी में कोई रुकावट नहीं आएगी। जबकि वास्तु के अनुसार यह सही नहीं है, क्योंकि विवाह के बाद अधिकतर कार्ड फेंक दिए जाते हैं या कहीं रख दिए जाते हैं, जिससे गणेश जी की छवि का अपमान होता है। इसलिए कार्ड पर तस्वीर की बजाय आप ‘श्री गणेशाय नमः’, ‘शुभ विवाह’ या ‘शुभ मंगलम’ जैसे मंगल वाक्य लिख सकते हैं।
कार्ड का शुभ रंग और मंत्र:
वास्तु शास्त्र के अनुसार विवाह निमंत्रण पत्र का रंग सकारात्मक ऊर्जा देने वाला होना चाहिए। जैसे लाल, पीला, केसरिया या सफेद रंग के कार्ड को शुभ माना गया है, क्योंकि ये रंग प्रेम, सौहार्द और सौभाग्य का प्रतीक हैं।
कार्ड पर शुभता के लिए गणेश मंत्र या विष्णु मंत्र अवश्य लिखवाना चाहिए, जैसे- “मंगलं भगवान विष्णु, मंगलं गरुड़ध्वजः, मंगलं पुंडरीकाक्षो, मंगलायतनो हरिः।
कार्ड में दें ये आवश्यक जानकारी:
विवाह निमंत्रण पत्र में कुछ जानकारी अवश्य होनी चाहिए जैसे
गणेश या माता पूजन का समय
हल्दी, मेहंदी, मंडप और फेरे की तिथि
प्रतिभोज या रिसेप्शन का स्थान और समय
वर-वधु और उनके माता-पिता के नाम
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