धर्म-अध्यात्म

Vrishabha Sankranti: वृषभ संक्रांति आज, जानें शुभ मुहूर्त और दान का महत्व

Sarita
15 May 2025 10:03 AM IST
Vrishabha Sankranti:   वृषभ संक्रांति आज, जानें शुभ मुहूर्त और दान का महत्व
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Vrishabha Sankranti: आज वृषभ संक्रांति है। यह एक अत्यंत पावन और शुभ अवसर है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष को छोड़कर वृष राशि में प्रवेश करते हैं। यह संक्रांति का क्षण न केवल खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
वृषभ संक्रांति के दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करके आत्मशुद्धि करते हैं। इस दिन व्रत-उपवास, दान-पुण्य और सूर्य की उपासना करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन गंगा आदि तीर्थों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को दिव्य पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने से आयु, स्वास्थ्य और तेज में वृद्धि होती है।
इस संक्रांति पर यदि कोई शुभ योग भी बनता है, तो व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान की शक्ति और भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि वृषभ संक्रांति को धर्म, श्रद्धा और आत्मिक जागरूकता का पर्व माना जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मकता का संचार करता है।
वृषभ संक्रांति तिथि
वृषभ संक्रांति 2025 का पर्व आज 15 मई 2025 को मनाया जा रहा है । सूर्य देव देर रात 12:11 बजे अपनी वर्तमान राशि मेष से निकलकर वृष राशि में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्य का यह गोचर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है, और इसी के साथ वृषभ संक्रांति का शुभारंभ होता है।
वृषभ संक्रांति 2025 के शुभ मुहूर्त
पुण्य काल: प्रातः 05:57 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
महा पुण्य काल: प्रातः 05:30 बजे से 07:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक
शुभ योग:
शिव योग: प्रातः 07:02 बजे तक
इसके बाद रातभर सिद्ध योग और भद्रावास योग का प्रभाव रहेगा, जो दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माने जाते हैं।
पूजा-पाठ के विशेष मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:07 – 04:49
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:33 – 03:28
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 – 07:25
निशिता मुहूर्त: रात 11:57 – 12:38
करें इन चीज़ों का दान
वृषभ संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किया गया दान न केवल सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करता है, बल्कि पितृ दोष, ग्रह बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से भी मुक्ति दिलाता है। आइए जानते हैं इस पावन अवसर पर किन वस्तुओं का दान करना विशेष रूप से शुभ माना गया है।
तिल और गुड़
तिल और गुड़ का दान करने से पितृ शांति मिलती है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। इसे किसी गरीब या ब्राह्मण को दान देना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
देसी घी और शक्कर
देसी घी और शक्कर का दान घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। यह दान विशेष रूप से गर्मी के मौसम में शीतलता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
वस्त्रों का दान
वृषभ संक्रांति पर नए या साफ-सुथरे वस्त्रों, विशेष रूप से सफेद या पीले रंग के कपड़ों का दान करना बहुत शुभ होता है। इससे सौभाग्य और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
जल से भरे घड़े
मिट्टी या तांबे के घड़े में जल भरकर दान करने से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। यह गर्मी में शीतलता और राहत का प्रतीक है, और मानव सेवा का एक पवित्र रूप भी है।
फल और मिठाइयां
इस दिन फल और मिठाई का दान करने से घर में अन्न-धन की वृद्धि होती है और मन में संतोष व प्रसन्नता बनी रहती है।
चांदी या तांबे के पात्र
धातु के बर्तन, विशेषकर चांदी या तांबे के, दान करना सूर्य और चंद्र से जुड़ी समस्याओं से राहत देता है। यदि यह पात्र जल या अन्न से भरे हों, तो इनका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
इन सभी दानों को श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से करना चाहिए। इससे ना केवल जीवन में सुख-शांति आती है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी व्यक्ति का उत्थान होता है।
वृषभ संक्रांति का महत्व हिंदू धर्म में अत्यंत खास माना गया है। इस दिन सूर्य जब मेष राशि से निकलकर वृष राशि में प्रवेश करता है, तो इसे एक पुण्यकाल के रूप में देखा जाता है। इस अवसर पर स्नान, दान, जप और तप करने से न केवल पापों का क्षय होता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शुद्धि का भी संचार होता है। यह संक्रांति विशेष रूप से सूर्य देव की आराधना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन सूर्य को अर्घ्य, पवित्र नदियों में स्नान, और ज़रूरतमंदों को दान करने से धन, आयु, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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