धर्म-अध्यात्म

Vrishabha Sankranti Daan: वृषभ संक्रांति कल, जानें इसका महत्व, पूजा विधि और उपाय

Sarita
14 May 2025 10:01 AM IST
Vrishabha Sankranti Daan: वृषभ संक्रांति कल, जानें इसका महत्व, पूजा विधि और उपाय
x
Vrishabha Sankranti Daan: वृषभ संक्रांति न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी विशेष महत्व रखती है। इस दिन सूर्य पूजा, तीर्थ स्नान, पितृ तर्पण और दान-पुण्य जैसे कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। ‘वृषभ’ का संबंध भगवान शिव के वाहन नंदी से जुड़ा है, इसलिए इस दिन गौ पूजा और सेवा का भी विशेष महत्व होता है। आइये जानते हैं पूजा विधि और किए जाने वाले शुभ कार्यों के बारे में।
हिंदू धर्म में वृषभ संक्रांति को एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह संक्रांति उस समय आती है जब सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। वर्ष 2025 में यह संक्रांति 14 मई, बुधवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय दृष्टि से यह एक विशेष खगोलीय घटना है, जो ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है। इस समय ग्रीष्म ऋतु अपने चरम पर होती है और सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश गर्मी की तीव्रता को और बढ़ा देता है।
क्या होती है संक्रांति:
संक्रांति का अर्थ होता है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना। पूरे वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं, क्योंकि सूर्य हर महीने एक राशि से दूसरी में प्रवेश करता है। इनमें से कुछ संक्रांतियां जैसे मकर, वृषभ, सिंह आदि विशेष रूप से धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। वृषभ संक्रांति के साथ नौतपा की शुरुआत होती है, जिससे ग्रीष्म ऋतु की तीव्रता बढ़ती है।
वृषभ संक्रांति का धार्मिक महत्व:
वृषभ संक्रांति का दिन धर्म-कर्म, दान और सूर्य पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। यह दिन आत्मशुद्धि, तप और पुण्य अर्जन के लिए उपयुक्त समय होता है। इस संक्रांति को भगवान शिव के वाहन नंदी (बैल) से भी जोड़ा जाता है, इसलिए इस दिन गायों और बैलों की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन तीर्थ स्नान करने से मन, वचन और कर्म से हुए पापों का क्षय होता है। यदि किसी कारणवश तीर्थ जाना संभव न हो तो घर पर ही जल में गंगाजल, तिल और तुलसी डालकर स्नान करना शुभ होता है।
वृषभ संक्रांति पर इस विधि से करें पूजन:
वृषभ संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें कुमकुम, अक्षत (चावल) और फूल मिलाकर सूर्य को अर्पित करें। सूर्य मंत्रों का उच्चारण करते हुए अर्घ्य देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, चप्पल, पंखा, छाता आदि का दान करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
गर्मी में पक्षियों और जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था करें। ज़रूरतमंदों को भोजन कराना, रोगियों की सेवा करना और गरीबों को दान देना अत्यंत शुभ माना गया है।
पितरों की शांति के लिए इस दिन तर्पण करना अत्यंत लाभकारी होता है। यह दिन पितृ कर्म के लिए भी बहुत शुभ माना गया है।
इस दिन की गई साधना और मंत्र जाप जल्दी फल देते हैं। विशेष रूप से सूर्य, विष्णु और शिव के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
गाय को हरा चारा खिलाना, उन्हें स्नान कराना और सेवा करना विशेष रूप से पुण्यदायक होता है।
Next Story