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धर्म-अध्यात्म
Vrischika Sankranti 2025: वृश्चिक संक्रांति पर कैसे करें सूर्य देव की पूजा और किन चीजों का करें दान
Sarita
15 Nov 2025 11:26 AM IST

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Vrischika Sankranti 2025: वृश्चिक संक्रांति का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सूर्य देव तुला राशि से निकलकर मंगल की राशि वृश्चिक में प्रवेश करते हैं। इस संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद पुण्य का काम माना गया है। वहीं जो व्यक्ति इस तिथि पर नदी स्नान करने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देता है उसके जीवन की सारी समस्याओं का अंत हो जाता है। साथ ही मान-सम्मान में भी वृद्धि होती है। इस दिन दान भी जरूर करना चाहिए। चलिए आपको बताते हैं अब वृश्चिक संक्रांति के शुभ मुहूर्त और विशेष उपाय।
वृश्चिक संक्रांति पुण्य काल 2025 :
वृश्चिक संक्रान्ति - 16 नवंबर 2025, रविवार
वृश्चिक संक्रान्ति पुण्य काल - 08:02 AM से 01:45 PM
वृश्चिक संक्रान्ति महा पुण्य काल - 11:58 AM से 01:45 PM
वृश्चिक संक्रान्ति का क्षण - 01:45 PM
वृश्चिक संक्रांति पर क्या करें:
संक्रांति तिथि पर दान, स्नान और अर्घ्य, यह तीन कार्य जरूर करने चाहिए। वृश्चिक संक्रांति पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य दोष और पितृ दोष का निवारण होता है। इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन आदि दान करना श्रेष्ठ माना जाता है।वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य उपासना के बाद गुड़ और तिल का प्रसाद बांटने की परंपरा है।
वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य की पूजा कैसे करें :
वृश्चिक संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी में या घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
इसके बाद तांबे के लोटे में लाल चंदन, हल्दी, सिंदूर और रोली मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
सूर्य भगवान को गुड़ से बनी खीर का भोग लगाएं। साथ ही, सूर्य देव को धूप दिखाएं।
सूर्य देव की आराधना के बाद गरीबों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुओं का दान अवश्य करें।
वृश्चिक संक्रांति पर सच्चे मन से सूर्य देव की अराधना करें क्योंकि ऐसा करने से अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इस संक्रांति के दिन माता-पिता के चरण स्पर्श करें और उनका आशीर्वाद लें। इससे आपका भाग्योदय होगा।
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