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Vishwakarma Puja Prasad: विश्वकर्मा पूजा पर भगवान को अर्पित करें ये चीजें, पूरी होगी हर मनोकामना

Sarita
16 Sept 2025 8:43 AM IST
Vishwakarma Puja Prasad: विश्वकर्मा पूजा पर भगवान को अर्पित करें ये चीजें, पूरी होगी हर मनोकामना
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Vishwakarma Puja Prasad: भगवान विश्वकर्मा को संसार का प्रथम वास्तुकार और शिल्पकार माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने सृष्टि के निर्माण में अपने पिता भगवान ब्रह्मा की सहायता की थी। इतना ही नहीं, विश्वकर्मा जी ने देवताओं के अस्त्र-शस्त्र, रथ, महल और नगरों का निर्माण किया था। हिंदू पौराणिक कथाओं में उन्हें निर्माण और शिल्पकला के देवता के रूप में पूजा जाता है। विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा प्रकट हुए थे। विश्वकर्मा जयंती तब मनाई जाती है जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है।
विश्वकर्मा पूजा कब मनाई जाएगी:
हर साल 17 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इस दिन यह पर्व मनाया जाता है। खास बात यह है कि विश्वकर्मा जयंती की तिथि चंद्रमा की स्थिति से नहीं, बल्कि सूर्य की स्थिति के आधार पर तय होती है। मान्यता के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा का जन्म कन्या संक्रांति के दिन हुआ था।
हर साल विश्वकर्मा पूजा भाद्रपद माह के अंतिम दिनों या आश्विन माह में आयोजित की जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा की जाती है, जिन्हें ब्रह्मांड का प्रथम इंजीनियर, शिल्पकार और दिव्य वास्तुकार माना जाता है। विशेषकर कारखानों, कार्यस्थलों और मशीनरी से जुड़े लोग इस अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करते हैं।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा को प्रसन्न करने के लिए शुद्ध मन, स्वच्छ वातावरण और पूर्ण श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान प्रसाद का विशेष महत्व होता है। इसे भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में वितरित करना भी शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
विश्वकर्मा पूजा के दिन अर्पित किए जाने वाले मुख्य प्रसाद:
पंचामृत: दूध, दही, शहद, घी और चीनी से बने पंचामृत का भोग लगाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
ताजे फल: केला, नारियल, अनार, अमरूद और मौसमी फल समृद्धि और शुभता के प्रतीक हैं।
मिठाई: भगवान को लड्डू, बूंदी या मोदक जैसी मिठाइयाँ अर्पित की जाती हैं।
नारियल और सुपारी: नारियल पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में वितरित करना शुभ होता है।
पान और इलायची: पान और इलायची भी शुभ माने जाते हैं और पूजा के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में वितरित किया जा सकता है।
इन प्रसादों को चढ़ाने का
महत्व
यह है कि भगवान विश्वकर्मा कार्यक्षेत्र में उन्नति, संसाधनों की सुरक्षा और व्यापार में वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। भक्तिपूर्वक प्रसाद चढ़ाने से कार्य में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। विश्वकर्मा पूजा पर पंचामृत, ताजे फल, मिठाई और नारियल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे कार्य में सफलता, संसाधनों की सुरक्षा और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
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