धर्म-अध्यात्म

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी व्रत में पढ़ें ये कथा, जीवन में हर कदम पर मिलेगी जीत

Sarita
13 Feb 2026 7:44 AM IST
Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी व्रत में पढ़ें ये कथा, जीवन में हर कदम पर मिलेगी जीत
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Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत विजय पाने के लिए बहुत लाभदायी माना जाता है. इस साल विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को है. विजया एकादशी के ​दिन कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं और इन संयोगों में भगवान विष्णु का पूजन किया जाए तो शुभ फल की प्राप्ति होती है. इस दिन सिद्ध योग बन रहा है. विजया एकादशी का व्रत श्रीराम ने भी किया था. इस व्रत में कथा का पाठ करना आवश्यक होता है मान्यता है इसे श्रीहरि पूजन जल्द स्वीकार करते हैं|
श्रीराम ने क्यों रखा था विजया एकादशी व्रत:
यह एकादशी जीत, सफलता और आत्मबल का प्रतीक मानी जाती है. यह व्रत आत्मशुद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है और पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है. धार्मिक शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भगवान राम ने भी लंका विजय से पहले इस पावन एकादशी का व्रत किया था, जिसके बाद उन्हें विजय प्राप्त हुई |
विजया एकादशी पूजा मुहूर्त:
फाल्गुन माह के कृष्ण पत्र की एकादशी 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12.22 पर शुरू हो जाएगी और 13 फरवरी 2026 को दोपहर 2.25 पर इसका समापन होगा|
पूजा मुहूर्त - सुबह 06:48 - सुबह 9.41
विजया एकादशी व्रत कथा :
विजया एकादशी की पौराणिक कथा अनुसार जब भगवान श्री राम माता सीता को रावण से मुक्त कराने के लिए लंका की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उनकी सेना के सामने समुद्र को पार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। समुद्र को बिना किसी साधन के पार करना असंभव प्रतीत हो रहा था। तभी वनार सेना के किसी सदस्य ने सुझाव दिया कि पास के वन में ऋषि वकदाल्भ्य का आश्रम है उनकी सलाह लेना अवश्य लाभकारी होगी। भगवान श्रीराम तुरंत ऋषि बकदाल्भ्य के पास पहुंचे और उन्हें अपनी समस्या बताई। तब ऋषि ने भगवान राम को विजया एकादशी व्रत के बारे में बताया और कहा कि अगर वे इस व्रत को विधि-विधान से करेंगे तो उन्हें अपने कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी। ऋषि ने कहा कि इस एकादशी व्रत को करने से बड़े से बड़ा कार्य भी सिद्ध हो जाता है।
इसके बाद भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी और पूरी वानर सेना ने पूरी श्रद्धा से विजया एकादशी का व्रत रखा और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की। साथ ही रात्रि में जागरण भी किया। व्रत के प्रभाव से भगवान श्रीराम को दिव्य सहायता प्राप्त हुई। अगले ही दिन समुद्र देव प्रकट हुए और उन्होंने समुद्र पार करने का मार्ग बताया। इसके बाद नल और नील ने सेतु निर्माण का कार्य आरंभ किया और देखते ही देखते रामसेतु तैयार हो गया। इस प्रकार भगवान श्रीराम ने अपनी सेना सहित समुद्र पार कर लंका पर विजय प्राप्त की और माता सीता को मुक्त करा लिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करता है, उसे जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय प्राप्त होती है।
श्रीराम ने कैसे किया व्रत:
हे मर्यादा पुरुषोत्तम! इस उपवास के लिये दशमी के दिन स्वर्ण, चाँदी, ताम्बे या मिट्टी का एक कलश बनायें. उस कलश को जल से भरकर तथा उस पर पञ्च पल्लव रखकर उसे वेदिका पर स्थापित करें.
उस कलश के नीचे सतनजा अर्थात मिले हुये सात अनाज और ऊपर जौ रखें. उस पर भगवान विष्णु की स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित करें.
एकादशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान श्रीहरि का पूजन करें. वह सारा दिन भक्तिपूर्वक कलश के सामने व्यतीत करें और रात को भी उसी तरह बैठे रहकर जागरण करें.
द्वादशी के दिन नदी या तालाब के किनारे स्नान आदि से निवृत्त होकर वह कलश ब्राह्मण को दे दें. हे दशरथनन्दन! यदि आप इस व्रत को सेनापतियों के साथ करेंगे तो अवश्य ही विजयश्री आपका वरण करेगी.
मुनि के वचन सुन तब श्रीरामचन्द्रजी ने विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया और इसके प्रभाव से राक्षसों के ऊपर विजय प्राप्त की|
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