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Varalaxmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत पर पढ़ें ये चमत्कारी कथा, आपके घर पर बरसेगी सुख-समृद्धि और लक्ष्मी की कृपा

Sarita
8 Aug 2025 6:52 AM IST
Varalaxmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत पर पढ़ें ये चमत्कारी कथा, आपके घर पर बरसेगी सुख-समृद्धि और लक्ष्मी की कृपा
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Varalaxmi Vrat Katha: हिंदू धर्म में श्रावण मास का बहुत ही विशेष महत्व है। इस माह के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 8 अगस्त, शुक्रवार को रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से दक्षिण भारत, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन अब इसकी मान्यता पूरे देश में बढ़ रही है। मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। वरलक्ष्मी व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है, जिसे पढ़ने से घर में सुख-शांति आती है और देवी लक्ष्मी की कृपा बरसती है। आइए जानते हैं।
वरलक्ष्मी व्रत कथा:
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में मगध देश के भद्रश्री नगर में चारुमति नाम की एक स्त्री अपने पति और परिवार के साथ रहती थी। वह अत्यंत धार्मिक, पतिव्रता और सेवाभावी थी। चारुमति नियमित रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा करती थी। उसकी भक्ति और आस्था से प्रसन्न होकर, देवी लक्ष्मी ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और कहा, "हे चारुमती, तुम श्रावण शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत करो, तुम्हें अखंड सौभाग्य, धन-संपत्ति और समृद्धि की प्राप्ति होगी।" स्वप्न से जागने के बाद, चारुमती ने अपनी सहेलियों और नगर की अन्य स्त्रियों को इस व्रत के बारे में बताया। सभी ने मिलकर विधि-विधान से व्रत किया। परिणामस्वरूप, सभी के घरों में धन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वास हुआ। तभी से यह व्रत वरलक्ष्मी व्रत के रूप में प्रचलित हो गया।
वरलक्ष्मी व्रत क्या है?
वर का अर्थ है वरदान और लक्ष्मी का अर्थ है धन, वैभव और समृद्धि की देवी। वरलक्ष्मी व्रत का उद्देश्य देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करना और उनसे जीवन में सुख, शांति, धन, स्वास्थ्य और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करना है। विशेष रूप से विवाहित महिलाएं यह व्रत इसलिए रखती हैं ताकि उनके पति, बच्चे और परिवार सुखी रहें। इस दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है और विवाहित महिलाएं सज-धज कर व्रत रखती हैं।
वरलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि:
वरलक्ष्मी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें। तांबे या पीतल के कलश में जल भरकर उसमें सिक्के, सुपारी, चावल और फूल डालें। कलश पर आम के पत्ते रखें और उस पर लाल कपड़े में नारियल लपेट दें। कलश को पूजा स्थल पर स्थापित करें और देवी लक्ष्मी का आह्वान करें। कलश की पूजा करें, धूप, दीप, पुष्प, फल और मिठाई अर्पित करें। इस दिन वरलक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में देवी लक्ष्मी की आरती करें। पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएँ या उन्हें दान-दक्षिणा दें।
वरलक्ष्मी व्रत का मुख्य उद्देश्य देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अष्टलक्ष्मी (धन, समृद्धि, शक्ति, पृथ्वी, ज्ञान, प्रेम, यश और शांति) की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए मनाया जाता है।
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