धर्म-अध्यात्म

Vaishakh Maas 2025 Upay: श्री हरि को प्रिय वैशाख माह में करें ये चार उपाय, हर समस्या का होगा समाधान

Sarita
15 April 2025 8:46 AM IST
Vaishakh Maas 2025 Upay: श्री हरि को प्रिय वैशाख माह में करें ये चार उपाय, हर समस्या का होगा समाधान
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Vaishakh Maas 2025 Upay: हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख साल का दूसरा महीना है, जिसकी शुरुआत 13 अप्रैल से हो चुकी है और इसका समापन 12 मई को होगा। यह माह भगवान विष्णु को विशेष रूप से प्रिय माना गया है। धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस समय पवित्र नदियों में स्नान, दान और पुण्य कर्मों का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि वैशाख में पितरों के लिए किए गए तर्पण, पिंडदान और नाम से किए गए दान से पितृ दोष कम होता है और उनके आशीर्वाद से जीवन में शांति और सुख आता है।
वैशाख माह का महत्व:
मान्यता है कि त्रेता युग की शुरुआत वैशाख माह में ही हुई थी। इसे ‘माधव मास’ भी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु का ही एक नाम है। शास्त्रों के अनुसार इस महीने तुलसी के पत्ते अर्पित कर श्रीहरि की पूजा, और रोजाना पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का क्षय होता है और भाग्य प्रबल होता है। इस महीने में कुछ विशेष उपाय करने से भी कई तरह के लाभ मिलते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है:
“न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदवसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।।”
इसका अर्थ है कि वैशाख से श्रेष्ठ कोई महीना नहीं, सतयुग जैसा कोई युग नहीं, वेदों से बढ़कर कोई शास्त्र नहीं और गंगा जैसा कोई तीर्थ नहीं।
करियर में उन्नति के लिए उपाय:
इस माह में प्रतिदिन नदी स्नान के साथ पितरों के नाम तर्पण करना लाभकारी होता है। साथ ही 'ॐ माधवाय नमः' मंत्र का जाप तुलसी की माला से सुबह और शाम 108 बार करना चाहिए। भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करें और ज़रूरतमंदों की सहायता करें। भूमि पर सोने से भी करियर में प्रगति और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है।
धन और समृद्धि के लिए उपाय:
वैशाख मास में पंखा, अन्न, सफेद वस्त्र, तरबूज-खरबूज जैसे फल दान करने से घर में बरकत आती है। भगवान विष्णु और पितरों का ध्यान करने से धन और अन्न की वृद्धि होती है। साथ ही कुंडली के दोष भी शांत होते हैं। इस माह कोई भी अतिथि आपके घर आए तो उसे खाली हाथ न जाने दें, यह विशेष शुभ माना जाता है।
यदि इस माह में प्याऊ लगाई जाए या किसी प्यासे को ठंडा पानी पिलाया जाए, तो पितर तृप्त होते हैं और त्रिदेवों की कृपा भी प्राप्त होती है। ऐसा माना गया है कि इस माह में शीतल जल पिलाने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
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