धर्म-अध्यात्म

Vaishakh Amavasya: वैशाख अमावस्या पर कैसे जलाएं दीये, जानिए विधि, मंत्र और नियम

Sarita
26 April 2025 9:54 AM IST
Vaishakh Amavasya: वैशाख अमावस्या पर कैसे जलाएं दीये, जानिए विधि, मंत्र और नियम
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Vaishakh Amavasya: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, अमावस्या तिथि को चंद्र का प्रभाव न्यूनतम होता है, जिससे पितृ शक्ति का प्रभाव अधिक प्रबल होता है। ऐसा कहा गया है कि पितरों का एक दिन, मनुष्य के एक मास के समान होता है। इसलिए प्रत्येक माह की अमावस्या उनके लिए महत्वपूर्ण होती है, और विशेष रूप से वैशाख की अमावस्या गर्मी के तप और जल तत्व की तृप्ति को दर्शाते हुए उन्हें संतोष प्रदान करती है। आइए जानते हैं किसी विधि से जलाएं दीया, मंत्र और नियम। वैशाख अमावस्या हिन्दू पंचांग की वह विशेष तिथि है जब दिवंगत पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति हेतु श्रद्धा, दीपदान और तर्पण का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितृलोक के द्वार पृथ्वी की ओर खुलते हैं और पितर धरती पर अपनी संतानों से तर्पण, श्राद्ध और दीपदान की आशा रखते हैं। इस बार वैशाख अमावस्या 27 अप्रैल को मनाया जाएगा।
वैशाख अमावस्या मुहूर्त 2025
वैशाख अमावस्या आरंभ: 27 अप्रैल, रविवार, प्रात: 4:49
वैशाख अमावस्या तिथि समाप्त: 28 अप्रैल, सोमवार, देर रात्रि 01:00 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: 27 अप्रैल, प्रात: 04:17 से प्रात:05:00 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग:27 अप्रैल, प्रात:05:44 से 28 अप्रैल देर रात्रि 12:38 तक
कैसे जलाएं दीपक:
सूर्यास्त के बाद, घर की दक्षिण दिशा में एक शुद्ध स्थान पर सफेद कपड़ा बिछाकर पीतल, तांबे या मिट्टी का दीपक रखें।
दीपक में तिल का तेल भरें, क्योंकि यह पितृ दोष शांति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
दीपक में रुई की बाती बनाकर दक्षिण की ओर मुख करके जलाएं।
दीपक के पास पितरों के नाम का उच्चारण करें और श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
पितरों के लिए दीया जलाने के लाभ:
अमावस्या की रात जब पितर पृथ्वी पर लौटते हैं, तो उनके मार्ग में दीपक जलाने से वे खुश होकर आशीर्वाद देते हैं, जिससे परिवार की उन्नति होती है।
इस दिन पितरों के लिए दीपदान करने से घर में शांति बनी रहती है और पितर तृप्त होकर सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
पितरों के लिए दीपक जलाने से पितृ दोष शांत होता है, जिससे जीवन में आ रही रुकावटें और समस्याएं दूर होती हैं।
पितरों के लिए करें मंत्र जाप:
पितृ तर्पण मंत्र:
ॐ नमः पितृभ्यः स्वधा नमः ||
यह मंत्र पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करता है। इसके जाप से पितरों को तृप्ति मिलती है।
पितृ दोष शांति मंत्र
ॐ पितृदेभ्यः स्वाहा ||
इस मंत्र के जाप से पितृ दोष शांत होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
ॐ अकाशात् पतितं तर्पयामि, पृथिव्यां तर्पयामि, आकाशच देव्यां तर्पयामि।
यह मंत्र पितरों को सभी आकाशीय, पृथ्वी और देवताओं से संबंधित तर्पण अर्पित करता है, जिससे सभी पितर संतुष्ट होते हैं।
इन मंत्रों का जाप करते समय पूरे मन से श्रद्धा और सम्मान के साथ पितरों का ध्यान करें, और दीपक के सामने इन मंत्रों का जाप करें। इस क्रिया से जीवन में सुख, समृद्धि, और पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त होती है।
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