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Utpanna Ekadashi ki Aarti: इस आरती के बिना अधूरा है उत्पन्ना एकादशी का व्रत, जरूर करें इसका पाठ

Sarita
15 Nov 2025 11:03 AM IST
Utpanna Ekadashi ki Aarti: इस आरती के बिना अधूरा है उत्पन्ना एकादशी का व्रत, जरूर करें इसका पाठ
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Utpanna Ekadashi ki Aarti: उत्पन्ना एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि यह वह तिथि है जब एकादशी माता का जन्म हुआ था. धार्मिक मान्यता के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी के आसपास चंद्रमा की कलाओं में परिवर्तन देखने को मिलता है, जिसका असर मनुष्य के शरीर पर भी पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि उत्पन्ना एकादशी व्रत मन को स्थिर करने के लिए सर्वोत्तम होता है. इसके अलावा, यह व्रत पापों से मुक्ति भी दिलाता है. उत्पन्ना एकादशी के दिन माता की आरती जरूर करनी चाहिए. ऐसे में आइए पढ़ते हैं उत्पन्ना माता की आरती
उत्पन्ना एकादशी माता की आरती:
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी…॥
तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी…॥
पौष के कृष्णपक्ष की,सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी…॥
नाम षटतिला माघ मास में,कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥
विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी…॥
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी…॥
शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी…॥
योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी…॥
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी…॥
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी…॥
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूंविनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी…॥
परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होयपद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥
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