धर्म-अध्यात्म

Tula Sankranti 2025: तुला संक्रांति के दिन जपे ये मंत्र,दूर होंगे सारे संकट

Sarita
15 Oct 2025 9:40 AM IST
Tula Sankranti 2025: तुला संक्रांति के दिन जपे ये मंत्र,दूर होंगे सारे संकट
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Tula Sankranti 2025: सनातन धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व है, क्योंकि यह सूर्य देव के राशि परिवर्तन का प्रतीक है। जब ग्रहों के राजा सूर्य अपनी वर्तमान राशि कन्या को छोड़कर शुक्र की राशि तुला में प्रवेश करते हैं, तो इस काल को तुला संक्रांति कहते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार तुला संक्रांति शुक्रवार को पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और बंद भाग्य के ताले खुलते हैं।
तुला संक्रांति 2025, शुभ मुहूर्त और तिथि: तुला राशि में प्रवेश करेंगे।
तुला संक्रांति तिथि: शुक्रवार, 17 अक्टूबर, 2025।
पुण्य काल: सुबह 10:05 बजे से शाम 5:43 बजे तक।
महापुण्य काल: दोपहर 12:00 बजे से 3:48 बजे तक।
तुला संक्रांति के दिन इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप करें
सफलता और तेज के लिए 'बीज मंत्र':
यह सूर्य देव का सबसे शक्तिशाली और मौलिक मंत्र है, जिसके जाप से व्यक्ति का आत्मविश्वास और तेज बढ़ता है, जिससे हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
स्वास्थ्य और कष्टों से मुक्ति के लिए 'सूर्य गायत्री मंत्र'
ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति सभी रोगों और मानसिक समस्याओं से मुक्त हो जाता है।
ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात
अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करें:
जब आप सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं, तो इस मंत्र का जाप करने से सूर्य देव तुरंत प्रसन्न होते हैं।
ॐ घृणि सूर्याय नमः
'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ:
तुला संक्रांति पर स्नान के बाद, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अवश्य करें। मान्यता है कि भगवान राम ने भी युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए इस स्तोत्र का पाठ किया था। इसके पाठ से शत्रु बाधाएँ, भय और निराशा दूर होती है।
तुला संक्रांति पर पूजा की सरल विधि:
स्नान और शुद्धि: सूर्योदय से पहले उठें और किसी पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
सूर्य को अर्घ्य: एक तांबे के लोटे में जल भरें। उसमें लाल फूल, चावल और थोड़ा सा गुड़ डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें।
मंत्र जाप: अर्घ्य देते समय या उसके बाद, ऊपर दिए गए किसी भी मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
दान: अपनी क्षमतानुसार अन्न, वस्त्र, गुड़, तांबा या लाल रंग की वस्तुओं का दान करें।
व्रत और अर्घ्य: इस दिन सूर्य देव के लिए व्रत रखना भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद गुड़ और चावल से बने नैवेद्य का प्रसाद ग्रहण करें।
तुला संक्रांति का धार्मिक महत्व:
हिंदू धर्म में, संक्रांति सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण का प्रतीक है। एक वर्ष में 12 संक्रांतियाँ होती हैं, जिनमें तुला संक्रांति विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन सूर्य तुला राशि में प्रवेश करते हैं, जहाँ वे शनि के घर में रहते हैं। ज्योतिष के अनुसार, यह समय कर्म, न्याय, संतुलन और सौंदर्य का प्रतीक है। मान्यता है कि तुला संक्रांति के दिन दान, स्नान, जप और तप करने से जीवन से पाप नष्ट होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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