धर्म-अध्यात्म

40 दिन तक अखंड ज्योत जलाने की परंपरा, जानें पूरी कहानी

Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 3:59 PM IST
40 दिन तक अखंड ज्योत जलाने की परंपरा, जानें पूरी कहानी
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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित दक्षिणमुखी श्री हनुमान मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के कारण प्रसिद्ध है। संजय नगर के सेक्टर-23 में स्थित इस मंदिर में भगवान हनुमान के दर्शन करने के लिए स्थानीय लोगों के साथ दिल्ली और आसपास के शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर की सबसे चर्चित विशेषता 40 दिनों तक दीपक जलाने की परंपरा है। भक्तों की मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ बजरंगबली के सामने 40 दिनों तक दीपक जलाता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान बना चुका है।
45 से 50 साल पुराना बताया जाता है मंदिर
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणमुखी श्री हनुमान मंदिर का इतिहास करीब 45 से 50 वर्ष पुराना है। समय के साथ मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ती गई और यह क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो गया।मंदिर गाजियाबाद के संजय नगर स्थित महाराणा प्रताप मार्ग के पास है। इसकी पहचान दक्षिण दिशा की ओर मुख वाले हनुमान जी के स्वरूप से जुड़ी हुई है। मंदिर का स्थान स्थानीय धार्मिक स्थलों की निर्देशिकाओं में भी दर्ज है।हिंदू धार्मिक परंपराओं में भगवान हनुमान को शक्ति, साहस, भक्ति और संकटों से रक्षा करने वाला देवता माना जाता है। श्रद्धालु उन्हें संकटमोचन, पवनपुत्र और बजरंगबली जैसे नामों से पुकारते हैं।यही कारण है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में बड़ी संख्या में लोग हनुमान जी की आराधना करते हैं।
क्या है 40 दिन की अखंड ज्योत की मान्यता?
इस मंदिर की सबसे चर्चित परंपरा लगातार 40 दिनों तक दीपक जलाने से जुड़ी है। श्रद्धालु अपनी किसी विशेष इच्छा की पूर्ति के लिए भगवान हनुमान के सामने दीप प्रज्वलित करने का संकल्प लेते हैं।मान्यता के अनुसार, भक्त पूरी श्रद्धा के साथ निर्धारित अवधि तक पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान नियमित रूप से हनुमान जी का स्मरण और प्रार्थना की जाती है।कुछ श्रद्धालु देसी घी का दीपक जलाते हैं। धार्मिक परंपरा में घी के दीपक को पवित्रता और सकारात्मक भावनाओं का प्रतीक माना जाता है।भक्तों के बीच यह विश्वास प्रचलित है कि 40 दिनों तक संकल्प पूरा करने के बाद उनकी प्रार्थना स्वीकार होती है।हालांकि, यह एक धार्मिक आस्था है। मनोकामना पूरी होने का दावा श्रद्धालुओं के विश्वास पर आधारित है, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।
41वें दिन मनोकामना पूरी होने का विश्वास
इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता विशेष चर्चा में रहती है। कुछ श्रद्धालुओं का विश्वास है कि लगातार 40 दिन दीपक जलाने के बाद 41वें दिन उनकी मनोकामना पूरी हो सकती है।न्यूज18 लोकल की एक पूर्व रिपोर्ट में मंदिर सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी वीके अग्रवाल ने बताया था कि मंदिर में दीपक जलाने के लिए भक्त बड़ी संख्या में आते हैं।रिपोर्ट में मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेंद्र तिवारी ने भी इस परंपरा का उल्लेख किया था। उनके अनुसार, भक्त स्वच्छ वस्त्र पहनकर और श्रद्धापूर्वक दीपक जलाकर हनुमान जी की आराधना करते हैं।मंदिर में आने वाले श्रद्धालु नौकरी, पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत इच्छाओं को लेकर प्रार्थना करते हैं।
मंगलवार को विशेष पूजा का महत्व
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार भगवान हनुमान की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं।संजय नगर के दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में भी मंगलवार को विशेष धार्मिक गतिविधियों का महत्व बताया जाता है।श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन करने के साथ दीपदान और आरती में भाग लेते हैं। कई भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं।हनुमान चालीसा में भगवान हनुमान की शक्ति, भक्ति और श्रीराम के प्रति समर्पण का वर्णन मिलता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नियमित पाठ से मन को शांति और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है।
दिल्ली और आसपास के शहरों से आते हैं भक्त
संजय नगर के इस मंदिर की प्रसिद्धि केवल गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। यहां दिल्ली, मेरठ, हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु आते रहे हैं।पूर्व में प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा और अन्य राज्यों से भी भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं।कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की खुशी में मंदिर परिसर में भंडारे और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कराते हैं।ऐसे आयोजनों में आसपास के लोग भी शामिल होते हैं। इससे मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि सामुदायिक मेलजोल का केंद्र भी बन जाता है।
मंदिर नहीं आ सकने वाले भक्तों के लिए भी व्यवस्था
मंदिर से जुड़ी एक विशेष पहल का उल्लेख पुरानी मीडिया रिपोर्टों में मिलता है। इसके अनुसार, बुजुर्ग या अस्वस्थ श्रद्धालु जो व्यक्तिगत रूप से मंदिर नहीं पहुंच सकते, उनके लिए वीडियो कॉल के माध्यम से दर्शन और दीपक जलाने की व्यवस्था की गई थी।इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे लोगों को धार्मिक गतिविधियों से जोड़ना था, जो दूरी या शारीरिक परेशानी के कारण मंदिर नहीं आ पाते।हालांकि, वर्तमान में यह सुविधा उपलब्ध है या नहीं, इसकी पुष्टि मंदिर प्रबंधन से करनी होगी।
दक्षिणमुखी हनुमान जी का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं में दक्षिणमुखी हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व बताया जाता है। कई भक्त मानते हैं कि इस स्वरूप की पूजा करने से भय और मानसिक परेशानियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।कुछ धार्मिक परंपराओं में दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है। ऐसे में दक्षिणमुखी हनुमान जी की उपासना को रक्षा और निर्भयता की भावना से जोड़कर देखा जाता है।हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इन मान्यताओं की व्याख्या अलग हो सकती है।श्रद्धालुओं के लिए भगवान हनुमान की पूजा का मुख्य आधार विश्वास, सेवा, अनुशासन और भक्ति है।
आस्था और विश्वास का बना केंद्र
संजय नगर का दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर धार्मिक परंपराओं और स्थानीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यहां 40 दिनों तक दीपक जलाने की मान्यता श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।मंदिर से जुड़ी यह परंपरा बताती है कि किस तरह धार्मिक विश्वास कई पीढ़ियों तक लोगों के जीवन का हिस्सा बने रहते हैं।श्रद्धालुओं का मानना है कि बजरंगबली की आराधना से उन्हें मानसिक शांति, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों से जूझने की प्रेरणा मिलती है।
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