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धर्म-अध्यात्म
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से जुड़ी है खास मान्यता, जानें मां लक्ष्मी से कनेक्शन
Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 4:52 PM IST

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धर्म । धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और अन्य घरेलू सामान खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन इस दिन झाड़ू खरीदने का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि झाड़ू का संबंध मां लक्ष्मी से है और साफ-सुथरे घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल के अनुसार, धनतेरस पर दो झाड़ू खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है। इनमें से एक झाड़ू घर में इस्तेमाल के लिए रखी जाती है, जबकि दूसरी मंदिर में दान करने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और दान-पुण्य का फल मिलता है। हालांकि, ये परंपरागत मान्यताएं हैं, जिनका पालन लोग अपनी श्रद्धा और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार करते हैं।
धनतेरस 2026 कब मनाया जाएगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने की परंपरा है।
धनतेरस को धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन या अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं। कई परिवार नई झाड़ू भी खरीदकर घर लाते हैं।
झाड़ू को मां लक्ष्मी से क्यों जोड़ा जाता है?
हिंदू धर्म में झाड़ू को स्वच्छता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में साफ-सफाई रहती है, वहां सकारात्मक वातावरण बना रहता है। इसी वजह से झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है।
मान्यता है कि धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदकर घर लाने से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। झाड़ू घर की गंदगी को साफ करती है, इसलिए इसे नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक भी माना जाता है।हालांकि, यह धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरा है। इसे धन प्राप्ति की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए।
धनतेरस पर दो झाड़ू खरीदने की क्या है मान्यता?
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल के अनुसार, धनतेरस पर दो झाड़ू खरीदने की मान्यता प्रचलित है। इसके पीछे घर की स्वच्छता और दान-पुण्य से जुड़ी धार्मिक भावना मानी जाती है।
इस परंपरा के अनुसार:
- पहली झाड़ू: इसे अपने घर की साफ-सफाई के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि नई झाड़ू घर को स्वच्छ रखने और शुभता का प्रतीक मानी जाती है।
- दूसरी झाड़ू: इसे किसी मंदिर में दान करने की परंपरा बताई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर में उपयोगी वस्तु दान करना सेवा और पुण्य का कार्य है।
यह जरूरी नहीं है कि हर परिवार इसी परंपरा का पालन करे। लोग अपनी श्रद्धा, सुविधा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार दान कर सकते हैं।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदकर घर लाना शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में सींक या फूल वाली झाड़ू खरीदने और उसे साफ-सुथरी जगह पर रखने की सलाह दी जाती है।झाड़ू खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता का ध्यान रखना चाहिए। ऐसी झाड़ू चुनें, जिससे घर की सफाई आसानी से हो सके और वह लंबे समय तक इस्तेमाल में रहे।झाड़ू को घर में ऐसी जगह रखना बेहतर है, जहां वह रास्ते में बाधा न बने और स्वच्छता बनी रहे। इसे भोजन बनाने की जगह या खाने-पीने की वस्तुओं के पास रखने से बचना चाहिए।
धनतेरस पर पूजा और खरीदारी का क्या महत्व है?
धनतेरस को दीपावली उत्सव की शुरुआत माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा आरोग्य के लिए, मां लक्ष्मी की पूजा समृद्धि के लिए और कुबेर की आराधना धन-संपत्ति के लिए की जाती है।लोग इस दिन अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार बर्तन, सोना-चांदी, पूजा सामग्री और घरेलू जरूरत की वस्तुएं खरीदते हैं।धनतेरस पर खरीदारी का उद्देश्य केवल नई वस्तुएं घर लाना नहीं, बल्कि परिवार की खुशहाली और मंगल की कामना करना भी है। इसलिए अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर खरीदारी करना उचित है।
मंदिर में झाड़ू दान करने का महत्व
धार्मिक परंपराओं में दान को सेवा और परोपकार का माध्यम माना गया है। मंदिर में झाड़ू देने का उद्देश्य पूजा स्थल की साफ-सफाई में सहयोग करना भी हो सकता है।यदि आप धनतेरस पर झाड़ू दान करना चाहते हैं, तो मंदिर के प्रबंधन से पूछकर ही दान करें, ताकि वस्तु का सही उपयोग हो सके।दान का महत्व उसकी कीमत से अधिक भावना और उपयोगिता में माना जाता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार किया गया छोटा-सा दान भी सेवा का अच्छा माध्यम हो सकता है।
धनतेरस पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
धनतेरस और दीपावली के समय घर की साफ-सफाई करने की परंपरा है। लोग घर के कोनों, पूजा स्थल और प्रवेश द्वार की विशेष सफाई करते हैं।धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ घर में मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। व्यावहारिक रूप से भी साफ-सफाई से धूल, गंदगी और कीटों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।इस दिन घर को स्वच्छ रखने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना, बुजुर्गों का सम्मान करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ कार्य माने जाते हैं।
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