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चक्रवात अर्नब को लेकर केंद्र अलर्ट कैबिनेट सचिव ने की तैयारियों की समीक्षा
Ratna Netam
26 Oct 2026 4:48 PM IST

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नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे संभावित चक्रवात ‘अर्नब’ को देखते हुए केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संभावित चक्रवात से प्रभावित होने वाले राज्यों की तैयारियों, राहत एवं बचाव व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि चक्रवात के दौरान जनहानि को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के अनुसार, चक्रवात के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तटवर्ती क्षेत्रों के आसपास पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें आपसी समन्वय के साथ तैयारियों में जुटी हैं।
मौसम विभाग ने तेज हवाओं और भारी बारिश की जताई आशंका
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बैठक में चक्रवात की मौजूदा स्थिति और संभावित दिशा के बारे में जानकारी दी। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार, तूफान के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तट के बीच बापटला तथा विशाखापत्तनम के आसपास पहुंचने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है।तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका के मद्देनजर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। संबंधित प्रशासन को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है।
NDRF और बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश
NCMC की बैठक में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और अन्य संबंधित एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा की गई। आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाने के लिए टीमें तैयार रखी जा रही हैं।थल सेना, नौसेना, वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल की राहत एवं बचाव टीमें भी जरूरत पड़ने पर मदद के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार का जोर इस बात पर है कि चक्रवात से होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जाए तथा प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।
राज्यों को आपसी समन्वय मजबूत करने को कहा
बैठक में राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया गया। प्रशासन को निर्देश दिया गया कि मौसम संबंधी चेतावनियां समय पर आम लोगों तक पहुंचाई जाएं और जिला स्तर पर आपात योजनाओं को सक्रिय रखा जाए।बिजली, पेयजल, परिवहन और संचार जैसी आवश्यक सेवाओं को सुचारु रखने के लिए भी संबंधित विभागों को सतर्क रहने की जरूरत है। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और सड़कों पर यातायात प्रभावित होने जैसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयारी करने को कहा गया है।प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहें।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए बंगाल की खाड़ी में मछुआरों को 29 अक्टूबर तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। समुद्र में खराब मौसम के दौरान मछली पकड़ने जाना जानलेवा साबित हो सकता है।तटीय प्रशासन को मछुआरा समुदाय तक मौसम संबंधी चेतावनियां पहुंचाने और समुद्र में मौजूद नौकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में भी एहतियाती तैयारी
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। राज्य के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से केंद्र को तैयारियों की जानकारी दी।राज्य प्रशासन के अनुसार, दक्षिण बस्तर में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका को देखते हुए सात SDRF टीमों को आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार रखा गया है। होमगार्ड और NDRF की टीमें भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। संभावित प्रभावित इलाकों में राहत शिविरों, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सामग्री, परिवहन और संचार व्यवस्था से संबंधित तैयारियां की जा रही हैं।
जनहानि रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता
कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने चक्रवात से निपटने की तैयारियों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने पर जोर दिया। बैठक का प्रमुख उद्देश्य संभावित नुकसान को कम करना, प्रभावित लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी सुनिश्चित करना है।आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के अनुसार प्रशासन को जरूरी कदम उठाने होंगे। केंद्र और राज्य सरकारों की तैयारियों के साथ-साथ मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना भी लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
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