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धर्म-अध्यात्म
नवरात्रि में लाल गुड़हल का खास महत्व, जानें वजह
Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 4:34 PM IST

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Shardiya Navratri 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस पावन पर्व पर देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त माता रानी की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं, कलश स्थापना करते हैं और प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा, आरती तथा मंत्र जाप करते हैं। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा को विभिन्न प्रकार के फूल अर्पित किए जाते हैं, लेकिन लाल रंग के गुड़हल के फूल का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह फूल देवी की शक्ति, ऊर्जा और साहस का प्रतीक है।
साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से हुई है। इस बार नवरात्रि का समापन मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर होगा। इन दिनों में माता के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है और भक्त अपने घरों तथा मंदिरों में विशेष पूजा करते हैं।
मां दुर्गा को क्यों प्रिय है लाल गुड़हल का फूल?
सनातन धर्म की धार्मिक परंपराओं में लाल गुड़हल को शक्ति की देवी की पूजा के लिए विशेष माना गया है। गुड़हल का गहरा लाल रंग ऊर्जा, साहस, शक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि मां दुर्गा और मां काली की पूजा में लाल गुड़हल का फूल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।
धार्मिक मान्यता है कि माता रानी को लाल गुड़हल अर्पित करने से भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं। यह फूल देवी के तेजस्वी स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से शक्ति उपासना में लाल रंग का महत्वपूर्ण स्थान है।
भक्तों का विश्वास है कि माता को प्रिय पुष्प अर्पित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली परेशानियों से संघर्ष करने की शक्ति मिलती है। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी मान्यताएं हैं।
लाल रंग का धार्मिक महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में लाल रंग को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह रंग शक्ति, उत्साह, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। देवी दुर्गा की प्रतिमाओं और चित्रों में भी लाल रंग का विशेष महत्व दिखाई देता है।नवरात्रि के दौरान भक्त माता रानी को लाल चुनरी, लाल पुष्प और श्रृंगार सामग्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि लाल रंग देवी के शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाता है।
गुड़हल का लाल फूल इसी भावना से जुड़ा हुआ है। इसका उपयोग विशेष रूप से देवी की पूजा में किया जाता है। कई परिवारों में नवरात्रि के नौ दिनों तक माता को प्रतिदिन ताजे लाल फूल अर्पित करने की परंपरा भी है।
नवरात्रि में गुड़हल का फूल कैसे चढ़ाएं?
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा को गुड़हल का फूल अर्पित करने के लिए भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर माता रानी के सामने दीपक जलाया जाता है।
पूजा के दौरान सबसे पहले देवी को जल, रोली, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद ताजा और स्वच्छ लाल गुड़हल का फूल माता के चरणों में चढ़ाया जा सकता है।फूल अर्पित करते समय भक्त 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद माता की आरती और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा की जाती है।
धार्मिक परंपराओं में पूजा के लिए साफ और ताजे फूलों का उपयोग करना शुभ माना जाता है। मुरझाए या खराब फूलों को पूजा में इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है।
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की होती है विशेष पूजा
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इनमें मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री शामिल हैं।
प्रत्येक स्वरूप का अपना धार्मिक महत्व है। भक्त अलग-अलग दिनों में माता के संबंधित स्वरूप की पूजा करते हैं। इस दौरान फूल, फल, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करने की परंपरा है।
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप, भजन-कीर्तन और कन्या पूजन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इन धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भक्त माता रानी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
गुड़हल का फूल चढ़ाने से क्या लाभ माने जाते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल अर्पित करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। माता की पूजा को साहस, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति से भी जोड़कर देखा जाता है।
कुछ परंपराओं में मान्यता है कि नियमित रूप से देवी की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। श्रद्धालु अपने जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति और परिवार की मंगलकामना के लिए देवी के चरणों में पुष्प अर्पित करते हैं।हालांकि, पूजा से मिलने वाले इन लाभों को धार्मिक विश्वास के रूप में ही समझना चाहिए।
पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
नवरात्रि के दौरान माता की पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा स्थल को साफ रखना चाहिए और यथासंभव ताजे पुष्प अर्पित करने चाहिए।
यदि लाल गुड़हल उपलब्ध नहीं है तो परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य उपयुक्त फूल भी चढ़ाए जा सकते हैं। देवी की पूजा में फूलों से अधिक महत्व भक्त की श्रद्धा और समर्पण को दिया जाता है।
धार्मिक परंपराओं में यह भी माना जाता है कि पूजा केवल सामग्री अर्पित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे विचार, संयम और दूसरों के प्रति सम्मान रखना भी भक्ति का हिस्सा है।
20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा समापन
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा को लाल गुड़हल अर्पित कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। भक्तों के लिए यह फूल केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि माता के प्रति श्रद्धा, शक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
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