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धर्म-अध्यात्म
सात मछलियों का भोज, Christmas पर क्यों मनाई जाती है यह खास परंपरा
Harrison
10 Dec 2025 10:24 PM IST

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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : हर साल क्रिसमस ईव पर इटालियन परिवारों के घरों में ‘सात मछलियों का भोज’ या Feast of the Seven Fishes का आयोजन किया जाता है। इस परंपरा में सात अलग-अलग प्रकार की मछलियों और सीफ़ूड डिशेज़ को एक विशेष रात्रिभोज के रूप में परोसा जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से अमेरिकी इटालियन समुदाय में प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी जड़ें इटली की पुरानी रीति-रिवाजों में हैं।
सात मछलियों के भोज का ईसाई धर्म और क्रिसमस से गहरा संबंध है। ईसाई धर्म में क्रिसमस के पहले दिन, यानी 24 दिसंबर को उपवास और मांसाहारी भोजन से परहेज़ करने की परंपरा रही है। इस दिन मछली और समुद्री खाने को मांसाहारी भोजन का विकल्प माना जाता था। इसलिए ईसाई परिवारों ने मांस के बजाय मछली और सीफ़ूड परोसने की परंपरा विकसित की।
परंपरा के अनुसार, सात मछलियों का चयन धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है। सात संख्या का ईसाई धर्म में विशेष महत्व है, जैसे सात दिन में सृष्टि का निर्माण, सात विवेकपूर्ण पाप और सात पुण्य। इस प्रकार, सात मछलियों का भोज केवल एक व्यंजन नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक भी है।
सात मछलियों के भोज में आम तौर पर सालमन, हेरिंग, हैलिबट, केटलफिश, समुद्री झींगे, स्कैलप्स और बैस जैसी मछलियों का प्रयोग होता है। इसके साथ ही समुद्री शल्क और अन्य सीफ़ूड को भी शामिल किया जाता है। कुछ परिवारों में संख्या सात से अधिक या कम भी हो सकती है, लेकिन पारंपरिक रूप से सात ही प्रमुख मानी जाती हैं।
यह परंपरा इटालियन प्रवासियों के साथ अमेरिका पहुंची और वहाँ व्यापक रूप से अपनाई गई। न्यूयॉर्क, शिकागो और फिलाडेल्फिया जैसे शहरों में अमेरिकी इटालियन परिवार क्रिसमस ईव पर इस भोज को बड़े धूमधाम से आयोजित करते हैं। यह केवल खाने का अवसर नहीं है, बल्कि परिवार और मित्रों को इकट्ठा करने का एक सामाजिक उत्सव भी है।
सात मछलियों के भोज की तैयारी में कई घंटे और कभी-कभी पूरे दिन लग जाते हैं। मछली को ताज़ा पकाना, विभिन्न तरीकों से तलना, भाप में पकाना या ग्रिल करना शामिल होता है। इसके अलावा, भोज के साथ पास्ता, ब्रेड और वाइन भी परोसी जाती है। यह परंपरा खाने के स्वाद और विविधता के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर और पारिवारिक एकता को भी बढ़ावा देती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परंपरा न केवल ईसाई धर्म से जुड़ी है, बल्कि समुद्री संसाधनों पर आधारित आहार की प्राचीन परंपराओं को भी दर्शाती है। क्रिसमस से पहले मछली खाने की प्रथा ने समय के साथ इस भोज को एक खास सांस्कृतिक पहचान दिलाई है।
सात मछलियों का भोज आज भी युवा पीढ़ी में लोकप्रिय है। सोशल मीडिया पर लोग अपने क्रिसमस ईव के भोज की तस्वीरें साझा करते हैं और यह परंपरा पूरी दुनिया में फैलती जा रही है। इसके अलावा, कई रेस्तरां और होटल भी इस विशेष भोज को अपने मेन्यू में शामिल कर चुके हैं।
सात मछलियों का भोज केवल स्वादिष्ट व्यंजन नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व का प्रतीक है। क्रिसमस के इस विशेष दिन यह परंपरा परिवारों को एक साथ लाने और पुराने रीति-रिवाजों को जीवित रखने का माध्यम बनती है।
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