धर्म-अध्यात्म

8 अक्टूबर से शुरू होगा पुण्यदायक Kartika मास, जानिए व्रत, स्नान और नियमों का विशेष महत्व

Harrison
7 Oct 2025 8:30 PM IST
8 अक्टूबर से शुरू होगा पुण्यदायक  Kartika मास, जानिए व्रत, स्नान और नियमों का विशेष महत्व
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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म: हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में कार्तिक मास की शुरुआत 8 अक्टूबर (बुधवार) से हो रही है, जो 7 नवंबर (शुक्रवार) तक चलेगा। कार्तिक माह को सनातन धर्म में सभी मासों में सबसे पवित्र और पुण्यदायक माना गया है। यह भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और भगवान शिव की उपासना का महीना है। मान्यता है कि कार्तिक मास में किया गया स्नान, ध्यान, व्रत, दान और पूजन कई जन्मों के पापों का नाश करता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। विशेष रूप से इस मास में प्रभु श्रीहरि विष्णु तुलसी के साथ विवाह करते हैं, जिसे 'तुलसी विवाह' कहा जाता है और यह माह के सबसे बड़े पर्वों में से एक है।
कार्तिक मास 2025 की अवधि
आरंभ: 8 अक्टूबर 2025, बुधवार (शरद पूर्णिमा के बाद की प्रतिपदा से)
समाप्ति: 7 नवंबर 2025, शुक्रवार (मार्गशीर्ष मास की अमावस्या तक)
यह मास अश्विन पूर्णिमा के बाद से शुरू होकर कार्तिक अमावस्या तक चलता है। इस दौरान कई पावन पर्व और उपासना विधियां होती हैं, जैसे:
करवा चौथ
अहोई अष्टमी
रमा एकादशी
धनतेरस
नरक चतुर्दशी
दीपावली
गोवर्धन पूजा
भाई दूज
तुलसी विवाह
देव उठनी एकादशी
चित्रगुप्त पूजन
यम द्वितीया
धार्मिक महत्त्व
भगवान विष्णु: कार्तिक मास को विष्णुजी का विशेष मास कहा गया है। इस पूरे महीने तुलसी की पूजा, दीपदान, और हरिपाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
शिव पूजा: इस मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाना और रुद्राभिषेक करना विशेष पुण्यदायक माना गया है।
तीर्थ स्नान का महत्व:
कार्तिक मास में प्रातःकाल पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी) में स्नान का अत्यंत महत्व है।
जो व्यक्ति इस माह "कार्तिक स्नान" करता है, उसे कई यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है।
दीपदान:
हर दिन संध्या के समय तुलसी के पास और मंदिरों में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
विशेष रूप से कार्तिक अमावस्या (दीपावली) को दीपदान का अत्यंत पुण्य फल बताया गया है।
कार्तिक मास में पालन किए जाने वाले नियम
कार्तिक माह के दौरान शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर साधक अधिकतम पुण्य अर्जित कर सकता है:
क्या न करें?
प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का सेवन न करें।
अधिक सोना, विलासिता, झूठ बोलना, क्रोध, ईर्ष्या आदि से बचें।
बाल कटवाना और नाखून काटना भी वर्जित माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त में न उठने को आलस्य कहा गया है — इससे कार्तिक मास का फल नहीं मिलता।
क्या करें?
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, विशेषकर शीतल जल से।
दीपदान, तुलसी पूजन, व्रत, और ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
गरीबों को कंबल, अन्न, वस्त्र और दीपक का दान करें।
रोजाना भगवद गीता का पाठ, विष्णु सहस्रनाम, और रामायण का श्रवण करें।
तुलसी विवाह और देव उठनी एकादशी
देव उठनी एकादशी (22 अक्टूबर 2025): इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा के बाद जागते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन होता है।
तुलसी विवाह (23 अक्टूबर 2025): इस दिन तुलसी माता और भगवान शालिग्राम (विष्णुजी) का प्रतीकात्मक विवाह होता है। इसे शुभ विवाह मुहूर्तों की शुरुआत भी माना जाता है।
दीपावली भी इसी माह में
इस वर्ष दीपावली पर्व भी कार्तिक मास में ही 20 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह तिथि कार्तिक अमावस्या के दिन आती है और लक्ष्मी पूजन, दीपदान और रात्रि जागरण का विशेष महत्व रखती है।
कार्तिक मास आत्मशुद्धि, उपासना और संयम का पर्व है। यह महीना न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति इस पूरे मास नियमपूर्वक व्रत, स्नान और पूजन करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है। तो इस 8 अक्टूबर से शुरू हो रहे कार्तिक मास में संयम और श्रद्धा के साथ उठाएं पुण्य कमाने का अवसर।
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