धर्म-अध्यात्म

इस साल दीपोत्सव 5 नहीं, 6 दिनों का होगा; एक ही दिन मनेगी छोटी और बड़ी Diwali, जानें पूरी तिथियां और खास वजह

Harrison
7 Oct 2025 7:47 PM IST
इस साल दीपोत्सव 5 नहीं, 6 दिनों का होगा; एक ही दिन मनेगी छोटी और बड़ी Diwali, जानें पूरी तिथियां और खास वजह
x
Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म: 2025 में दीपावली का उत्सव पहले से ज्यादा भव्य और खास होने जा रहा है। इस बार दीपोत्सव की अवधि आमतौर पर मनाए जाने वाले 5 दिनों से बढ़कर 6 दिनों की हो गई है। साथ ही एक और रोचक संयोग बन रहा है— छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली इस बार एक ही दिन मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह संयोग लंबे समय बाद बन रहा है, जिसने भक्तों और ज्योतिषाचार्यों के बीच खास उत्सुकता पैदा कर दी है।
कब से कब तक चलेगा दीपोत्सव 2025?
इस वर्ष दीपावली का पर्व 17 अक्टूबर (शुक्रवार) से शुरू होकर 22 अक्टूबर (बुधवार) तक मनाया जाएगा।
तिथि पर्व
17 अक्टूबर वसुबरस (धनतेरस से पहले)
18 अक्टूबर धनतेरस
19 अक्टूबर रूप चौदस / नर्क चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
20 अक्टूबर दीपावली (लक्ष्मी पूजन) + छोटी दिवाली
21 अक्टूबर गोवर्धन पूजा
22 अक्टूबर भाई दूज
छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक साथ क्यों?
इस बार 19 और 20 अक्टूबर, दोनों ही तिथियों को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) और लक्ष्मी पूजन (बड़ी दिवाली) का योग बन रहा है।
पंचांग के अनुसार:
नरक चतुर्दशी की तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर बाद शुरू होगी और 20 अक्टूबर को भी प्रात: तक प्रभावी रहेगी।
वहीं, अमावस्या तिथि (दीपावली) भी 20 अक्टूबर को ही रहेगी, जिससे उसी दिन लक्ष्मी पूजन भी संपन्न होगा।
इस खगोलीय और पंचांग संयोग के कारण 20 अक्टूबर को दोनों पर्व—छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली—एक साथ मनाए जाएंगे।
क्या कहता है धर्मशास्त्र?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, नरक चतुर्दशी और दीपावली में खास महत्व होता है।
नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था, इसी उपलक्ष्य में इसे 'छोटी दिवाली' कहते हैं।
वहीं दीपावली को भगवान राम के अयोध्या आगमन और माता लक्ष्मी के समुद्र मंथन से प्रकट होने की खुशी में मनाया जाता है।
पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जब तिथि संधिकाल बनता है, तब एक ही दिन दो पर्वों का योग बनता है, जो शास्त्र सम्मत और धार्मिक रूप से मान्य होता है।
क्यों है ये संयोग खास?
ऐसा दुर्लभ योग हर साल नहीं बनता।
त्योहारों के दिन बढ़ने से उत्सव का माहौल और रौनक ज्यादा दिनों तक बनी रहती है।
बाजार, कारोबार, पूजा-पाठ और सामाजिक आयोजनों को ज्यादा समय और ऊर्जा मिलती है।
6 दिन के दीपोत्सव का क्या होगा महत्व?
वसुबरस (17 अक्टूबर) – व्यापारी वर्ग इस दिन नया खाता (बहीखाता) पूजन करते हैं।
धनतेरस (18 अक्टूबर) – स्वास्थ्य देव धन्वंतरि की पूजा और खरीदारी का दिन।
नरक चतुर्दशी (19 अक्टूबर) – अपामार्ग स्नान और रूप सज्जा का पर्व।
दीपावली (20 अक्टूबर) – लक्ष्मी पूजन, दीप सज्जा, परिवार मिलन और नए आरंभ का दिन।
गोवर्धन पूजा (21 अक्टूबर) – अन्नकूट और श्रीकृष्ण की गोवर्धन पूजा।
भाई दूज (22 अक्टूबर) – भाई-बहन के प्रेम का पर्व, रक्षा और स्नेह का प्रतीक।
बाजारों में दिखने लगी रौनक
इस अनूठे संयोग की खबर के बाद से बाजारों में दीवाली की तैयारियां जोरों पर हैं। व्यापारी वर्ग को उम्मीद है कि इस साल त्योहार लंबा चलने से बिक्री में भारी इजाफा होगा।
सोना-चांदी, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों की बुकिंग शुरू हो चुकी है।
टूरिज्म इंडस्ट्री में भी दीवाली के दौरान परिवारों द्वारा ट्रैवल प्लान किए जा रहे हैं।
इस साल का दीपोत्सव न केवल तिथियों के लिहाज से अनोखा है, बल्कि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी विशेष बन गया है।
छोटी और बड़ी दिवाली एक साथ आना, और 6 दिन तक त्योहारों का सिलसिला चलना—यह 2025 के दीपोत्सव को यादगार बना देगा।
तो तैयार हो जाइए एक और लंबे, रोशनी और रसमों से भरे, प्रेम और उल्लास से सराबोर दीपावली उत्सव के लिए! 🪔✨
Next Story