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धर्म-अध्यात्म
Teachers Day Special: जाने कैसे गुरु बृहस्पति बने देवताओं के आचार्य
Sarita
5 Sept 2025 10:35 AM IST

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Teachers Day Special: हिंदू धर्म में गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊँचा माना जाता है। गुरु न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि जीवन जीने की राह भी दिखाते हैं। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम गुरु बृहस्पति का है। इन्हें देवताओं का मार्गदर्शक, नीति-शिक्षक और धर्म का दीपक कहा जाता है। लेकिन प्रश्न यह है कि बृहस्पति देवगुरु कैसे बने? आइए जानते हैं इस रहस्यमयी और प्रेरक कथा को।
बृहस्पति न केवल एक ऋषि और ज्योतिष के ज्ञाता थे, बल्कि देवताओं के गुरु, पुरोहित और शासन नीति-निर्माता भी बने। जब देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ, तो बृहस्पति ने देवताओं को सामरिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया। वहीं, असुरों के गुरु शुक्राचार्य थे, जिन्होंने अपनी नीति से उनका मुकाबला किया।
जन्म और नामकरण की कथा:
गुरु बृहस्पति का जन्म महर्षि अंगिरा और उनकी पत्नी स्मृति के घर हुआ था। वे बचपन से ही असाधारण ज्ञान और तेज से संपन्न थे। घोर तपस्या और ज्ञान साधना से उन्होंने ऐसा ज्ञान अर्जित किया कि स्वयं महादेव उनसे प्रसन्न हुए। शिव ने स्वयं उनका नाम बृहस्पति रखा और उन्हें देवताओं का गुरु घोषित किया। इसीलिए उन्हें देवगुरु की उपाधि मिली।
वे देवताओं के मार्गदर्शक क्यों बने?
देवताओं और दैत्यों के बीच सदैव युद्ध और संघर्ष होते रहते थे। दैत्यों के पास शुक्राचार्य जैसे चतुर गुरु थे। ऐसे में देवताओं को भी एक ऐसे गुरु की आवश्यकता थी जो उन्हें धर्म, नीति और युद्धनीति सिखा सके। बृहस्पति ने न केवल इंद्र और अन्य देवताओं को युद्ध कौशल सिखाया, बल्कि उन्हें यह भी बताया कि शक्ति तभी टिकती है जब वह धर्म पर आधारित हो।
धर्म और नीति की शिक्षा:
बृहस्पति ने देवताओं को सदैव यही शिक्षा दी कि शक्ति और वैभव स्थायी नहीं हैं, बल्कि धर्म और सत्य ही सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने देवताओं को संयम, कर्तव्य और मर्यादा का महत्व समझाया। यही कारण है कि इंद्र से लेकर अन्य देवता तक उन्हें अपना गुरु मानते थे और उनकी आज्ञा का पालन करते थे।
ज्योतिष और बृहस्पति ग्रह का महत्व:
बृहस्पति का नाम न केवल पौराणिक ग्रंथों में, बल्कि ज्योतिष शास्त्र में भी सर्वोच्च है। नवग्रहों में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और समृद्धि का कारक माना जाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति शुभ होता है, उसे जीवन में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और संतान सुख प्राप्त होता है। गुरुवार का व्रत भी उन्हें प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
बृहस्पति स्मृति और शास्त्रों का ज्ञान:
गुरु बृहस्पति ने अनेक शास्त्रों की रचना की। बृहस्पति स्मृति नामक ग्रंथ का आज भी धार्मिक शास्त्रों में महत्वपूर्ण स्थान है। यद्यपि इसका मूल रूप अब उपलब्ध नहीं है, फिर भी इसके उद्धरण अनेक ग्रंथों में मिलते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बृहस्पति केवल देवताओं के ही नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति के मार्गदर्शक थे।
आज भी उन्हें एक आदर्श गुरु क्यों माना जाता है?
गुरु बृहस्पति ने देवताओं को धर्म और नीति के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। उन्होंने यह संदेश दिया कि वास्तविक शक्ति केवल शस्त्रों में नहीं, बल्कि धर्म और सत्य में निहित है। यही कारण है कि आज भी उन्हें देवगुरु कहा जाता है और लोग उनकी पूजा करके जीवन में ज्ञान और समृद्धि की कामना करते हैं।
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