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धर्म-अध्यात्म
Surya Dev Aarti: रविवार के दिन सूर्यदेव की आरती क्यों है खास? जानें इसका महत्व
Sarita
1 Feb 2026 9:09 AM IST

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Surya Dev Aarti: सूर्यदेव को हिंदू धर्म में ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य, तेज और जीवन का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि सूर्यदेव की पूजा से साधक को शक्ति, सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. शास्त्रों में रविवार का संबंध सूर्यदेव से बताया गया है. कहते हैं कि रविवार के दिन यदि भक्त सच्चे मन से सूर्यदेव की पूजा और आरती करता है, तो भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और साधक को आशीर्वाद देते हैं|
रविवार के दिन सूर्यदेव की आरती का महत्व:
सफलता और मान-सम्मान: मान्यता है कि रविवार को सूर्यदेव की आरती करने से यश, पद-प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है|
आरोग्य: सूर्य को ‘आरोग्य का कारक’ माना जाता है. मान्यता है कि उनकी आरती और उपासना से शारीरिक रोगों, विशेषकर चर्म रोग और नेत्र दोष से मुक्ति मिलती है|
नकारात्मकता का नाश: सूर्य प्रकाश के प्रतीक हैं. उनकी आरती करने से जीवन का अंधकार, आलस्य और मानसिक तनाव दूर होता है|
ग्रह शांति: कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए रविवार के दिन सूर्यदेव की आरती अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है|
सूर्यदेव की आरती:
ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान.
जगत के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा.
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ॐ जय सूर्य भगवान.
सारथी अरुण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी.
तुम चार भुजाधारी॥
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटि किरण पसारे.
तुम हो देव महान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते.
सब तब दर्शन पाते॥
फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा.
करे सब तब गुणगान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते.
गोधन तब घर आते॥
गोधूलि बेला में,
हर घर हर आंगन में.
हो तव महिमा गान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
देव, दनुज, नर, नारी,
ऋषि-मुनिवर भजते.
स्तोत्र यह मंगलकारी,
इसकी रचना न्यारी.
दे नव जीवनदान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार.
महिमा तव अपरंपार॥
प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते,
बल, वृद्धि और ज्ञान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
भूचर, जलचर, खेचर,
सबके हो प्राण तुम्हीं.
सब जीवों के प्राण तुम्हीं॥
वेद-पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने.
तुम ही सर्वशक्तिमान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
पूजन करती दिशाएँ,
पूजे दश दिक्पाल.
तुम भुवनों के प्रतिपाल॥
ऋतुएँ तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत, अविनाशी.
शुभकारी अंशुमान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान.
जगत के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा॥
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान॥
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