धर्म-अध्यात्म

Surya Dev Ki Aarti: रविवार के दिन इस आरती से प्रसन्न होंगे नवग्रहों के राजा सूर्यदेव

Sarita
11 Jan 2026 8:17 AM IST
Surya Dev Ki Aarti: रविवार के दिन इस आरती से प्रसन्न होंगे नवग्रहों के राजा सूर्यदेव
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Surya Dev Ki Aarti: सनातन धर्म में रविवार का दिन पंचदेवता में से एक भगवान सूर्य के लिए समर्पित है. हिंदू मान्यता के अनुसार रविवार के दिन भगवान सूर्य की साधना और आराधना करने से व्यक्ति को सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है. सूर्यदेव की कृपा से उस व्यक्ति को जीवन में मान-सम्मान प्राप्त होता है. सदियों से चली आ रही जिस सूर्य पूजा को हिंदू धर्म से जुड़े लोग करते हैं उसमें की जाने वाली आरती का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि रविवार के दिन नवग्रहों के राजा सूर्य देवता की आरती करने पर ही उनकी पूजा पूर्ण होती है. आइए पढ़ते हैं सूर्य देव की आरती|
कैसे करें सूर्य देव की आरती?
जिस सूर्य देवता की पूजा का महत्व वेद और पुराण में बताया गया हो उनका आशीर्वाद पाने के लिए व्यक्ति को रविवार के दिन विशेष रूप से पूजा और आरती करनी चाहिए.
सूर्यदेव की पूजा और आरती करने के लिए सबसे पहले तन और मन से पवित्र हो जाएं.
इसके बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें रोली, अक्षत और लाल रंग के फूल डालें. उसके बाद दोनों हाथ से उसे सिर के ऊपर उठाकर सूर्य देवता को अर्घ्य दें.
सूर्य देवता को अर्घ्य देते समय उनके मंत्र ऊँ घृणि सूर्याय नम: का जप जरूर करें.
इसके बाद भगवान सूर्य की शुद्ध देशी घी के बने दीये और धूप को जलाकर विधि-विधान से आरती करें.
आरती के बाद भगवान सूर्य को प्रणाम करके सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगे|
सूर्यदेव की आरती:
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान..।।
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान,
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