धर्म-अध्यात्म

Surya Argya Niyam: सूर्य को अर्घ्य देने के बाद जरूर करें ये काम, तभी मिलते हैं इसके पूर्ण फल

Sarita
11 Nov 2025 12:03 PM IST
Surya Argya Niyam: सूर्य को अर्घ्य देने के बाद जरूर करें ये काम, तभी मिलते हैं इसके पूर्ण फल
x
Surya Argya Niyam: हिंदू धर्म में सूर्य को जल अर्पित करने का बड़ा महत्व बताया गया है। सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। सूर्य देव केवल प्रकाश का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वह जीवन में आत्मविश्वास, ऊर्जा और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान भी देते हैं। कई लोग नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को यह ज्ञात नहीं होता कि अर्घ्य देने के बाद क्या करना चाहिए या इसका सही तरीका क्या है।
शास्त्रों में सूर्य देव को जल चढ़ाने के सही नियमों के बारे में बताया गया है। यदि कोई व्यक्ति अर्घ्य देने के बाद केवल एक छोटा सा कार्य प्रतिदिन कर ले, तो सूर्य देव की कृपा उस पर बनी रहती है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
सूर्य को अर्घ्य देने के नियम:
शास्त्रों के अनुसार सूर्य को अर्घ्य देने के बाद तुरंत पीछे मुड़ना या सीधे घर के अंदर जाना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है। कुछ क्षण सूर्य की दिशा में खड़े होकर प्रणाम करें, आशीर्वाद प्राप्त करें। ऐसा करने से पूरे दिन में सफलता, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
सूर्य को अर्घ्य देने के बाद क्या करें?
जब उगते सूर्य को जल अर्पित करते हैं, तो वह जल धरती पर गिरता है और उसकी प्रत्येक बूंद सूर्य की किरणों के संपर्क में आकर ऊर्जा का स्वरूप धारण कर लेती है। शास्त्रों के अनुसार अर्घ्य के बाद उस जल को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। सबसे पहले उस जल को हल्के से अपने हाथों से स्पर्श करें और थोड़ी मात्रा में अपने माथे, छाती या बाहों पर लगाएं। ऐसा करने से सूर्य की ऊर्जा आपके शरीर में समा जाती है और दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है।
क्यों जरूरी है यह छोटा-सा कदम?
सूर्य देव शक्ति, ऊर्जा और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। जब आप अर्घ्य देते हैं, तो उस ऊर्जा से सीधा जुड़ाव होता है। यदि अर्घ्य देने के बाद तुरंत वहां से चले जाएं, तो उस क्षण की ऊर्जा अधूरी रह जाती है। जब आप उस पवित्र जल को अपने शरीर पर लगाते हैं, तो यह सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने जैसा कार्य होता है। ऐसा करने से शरीर में तेज बढ़ता है, चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
यह प्रक्रिया कमजोर सूर्य की स्थिति को भी संतुलित करती है। जिन लोगों के जीवन में आत्मविश्वास की कमी या अवसाद का भाव रहता है, उन्हें नियमित रूप से यह विधि अपनानी चाहिए। इससे धीरे-धीरे मानसिक और आत्मिक ऊर्जा में सुधार होता है।
Next Story