धर्म-अध्यात्म

Sunderkand Path: सुंदरकांड की इस चौपाई में छिपे हैं कई रहस्य

Sarita
12 Aug 2025 12:36 PM IST
Sunderkand Path: सुंदरकांड की इस चौपाई में छिपे हैं कई रहस्य
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Sunderkand Path: सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। इसी तरह मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी महाराज को समर्पित है। इस दिन भक्त मंदिरों में जाकर हनुमान जी की पूजा करते हैं। सुंदरकांड का पाठ करते हैं। सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। अगर आप भी सुंदरकांड का पाठ करना चाहते हैं और दोहे का अर्थ नहीं समझ पा रहे हैं, तो चिंता न करें। हम आपको हर दिन एक दोहे का अर्थ बताएंगे, जिससे आपको सुंदरकांड का पाठ करने का लाभ मिलेगा। दरअसल, धार्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना सुंदरकांड का पाठ करता है, तो मंगल ग्रह की प्रतिकूल स्थिति शुभ होगी। भगवान शनिदेव की भी विशेष कृपा प्राप्त होगी। सुंदरकांड में एक दोहा लिखा है, जो हनुमान जी की अद्भुत शक्ति और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति को दर्शाता है। राम कचहरी चार धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास ने इसके बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा-
'सिंधु तीर एक भूधर सुंदर, कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर।' अर्थात यह दोहा सुंदरकांड से लिया गया है। यह उस समय का दृश्य है जब हनुमान जी ने लंका में प्रवेश कर अपनी अद्भुत शक्तियों से सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। समुद्र तट पर एक सुंदर पर्वत था। हनुमान जी छलांग लगाकर उस पर्वत पर चढ़ गए।
'बार बार रघुबीर संभारी, तरकेउ पवनतनय बल भारी।' अर्थात हनुमान जी ने बार-बार भगवान राम का नाम लिया। फिर उसके बाद वे बड़े जोर से उछलकर हवा में उड़ने लगे। सुंदरकांड का यह दोहा हनुमान जी महाराज की शक्ति और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति को दर्शाता है।
शशिकांत दास बताते हैं कि प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को अपने जीवन में भय और संकट से मुक्ति मिलती है। इस कलियुग में हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जो जागृत रूप में विद्यमान हैं। ऐसे में सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को अपनी सभी मनोकामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है।
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