धर्म-अध्यात्म

Som Pradosh Vrat 2025: कल शिव भक्तों के लिए खास दिन, जानें सोम प्रदोष व्रत में क्या करें क्या नहीं

Sarita
16 Nov 2025 12:04 PM IST
Som Pradosh Vrat 2025: कल शिव भक्तों के लिए खास दिन, जानें सोम प्रदोष व्रत में क्या करें क्या नहीं
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Som Pradosh Vrat 2025: धार्मिक ग्रंथों में मार्गशीर्ष माह को सबसे शुभ माह माना गया है। इस माह में पूजा और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। सोमवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने पर इसे सोमेश्वर शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव की पूजा करने से स्वास्थ्य, धन और पारिवारिक सुख से जुड़ी सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
कल है सोम प्रदोष व्रत:
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर 2025 को प्रातः 4:47 बजे से प्रारंभ होकर 18 नवंबर को प्रातः 7:12 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 17 नवंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन सोमवार और प्रदोष तिथि का संयोग होने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
सोम प्रदोष व्रत के दौरान क्या करें:
दिन की शुरुआत मन की शुद्धता और पवित्रता से करें। भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
सोम प्रदोष के दिन निर्जल या केवल फलाहार का व्रत रखा जाता है। अपनी क्षमतानुसार व्रत करें।
सूर्यास्त के बाद के डेढ़ घंटे प्रदोष काल माने जाते हैं। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करना व्रत का मुख्य भाग है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
मंत्र जाप से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को भोजन दान करें।
सोम प्रदोष के दिन किन चीज़ों से बचना चाहिए?
क्रोध, अपशब्दों और नकारात्मक विचारों से बचें।
व्रत के दिन मन को शांत और संयमित रखना आवश्यक है।
लहसुन, प्याज, मांसाहारी भोजन और शराब से परहेज करें। व्रती को पूरे दिन सात्विक रहना चाहिए।
हो सके तो घर पर शांतिपूर्वक दिन बिताएँ और संध्या की प्रार्थना पर ध्यान केंद्रित करें।
प्रदोष काल में सोना वर्जित है।
यह भगवान शिव की पूजा का समय है, इसलिए इस दौरान सोना अशुभ माना जाता है।
किसी का अपमान न करें।
भगवान शिव को टूटे या मुरझाए हुए फूल न चढ़ाएँ।
कल का सोम प्रदोष क्यों खास है?
मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाला सोम प्रदोष अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से स्वास्थ्य, धन, विवाह और परिवार से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त:
17 नवंबर को शाम 5:27 बजे से रात 8:07 बजे तक पूजा करना शुभ है।
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