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Solah Somvar Vrat 2025: कब से शुरू करें सोलह सोमवार व्रत, जानें शुभ तिथि और पूजा विधि

Sarita
9 July 2025 10:52 AM IST
Solah Somvar Vrat 2025: कब से शुरू करें सोलह सोमवार व्रत, जानें शुभ तिथि और पूजा विधि
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Solah Somvar Vrat 2025:सोलह सोमवार व्रत की खास बात यह है कि इसे सावन जैसे पवित्र महीनों में शुरू करना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह महीना भोलेनाथ की आराधना के लिए विशेष होता है। इस व्रत में भक्त लगातार 16 सोमवार तक व्रत रखते हैं, भगवान शिव की पूजा करते हैं और व्रत कथा सुनते हैं। इस संकल्प से व्यक्ति को न सिर्फ पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं।
सोलह सोमवार व्रत का संकल्प कब करें:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत के लिए सबसे शुभ समय श्रावण मास को माना गया है। यह महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष फलदायी होता है। साल 2025 में श्रावण मास की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है और यह 9 अगस्त तक रहेगा।
इस दौरान पहला श्रावण सोमवार 14 जुलाई 2025 को पड़ रहा है, जो सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन से आप व्रत का संकल्प लेकर लगातार 16 सोमवार तक शिवजी का व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और व्रती की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
सोलह सोमवार व्रत विधि:
सोलह सोमवार व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें। स्त्रियां साफ़ सफ़ेद या हल्के रंग के वस्त्र पहन सकती हैं, जबकि पुरुष पारंपरिक धोती आदि धारण कर सकते हैं।
घर के पूजा स्थान या जहां शिवलिंग स्थापित है, वहां सफाई करें। फिर गंगाजल का छिड़काव करके पूरे स्थान को पवित्र करें।
शिवलिंग को पहले गंगाजल से स्नान कराएं, फिर गाय के दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से धोकर साफ करें। अभिषेक के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करते रहें।
अब भगवान शिव को बेलपत्र (त्रिपत्र सहित), धतूरा, भांग,सफेद पुष्प (जैसे कनेर, चमेली आदि),भस्म (विभूति),गाय का दूध, मिठाई, फल और शहद आदि सामग्रियां अर्पित करें।
अब बैठकर शांति से ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। चाहें तो रुद्राक्ष की माला का प्रयोग भी कर सकते हैं। साथ ही भगवान शिव के 108 नामों का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।
अब शिव चालीसा का पाठ करें। इसके बाद भगवान शिव की आरती करें।
पूजा के अंत में भगवान शिव से मनोकामना पूर्ण होने, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। व्रत पूर्ण श्रद्धा से रखें और संकल्प लें कि आप अगले 16 सोमवार तक इसी तरह नियमपूर्वक पूजा करेंगे।
पूरे दिन सात्विक आहार लें, अगर संभव हो तो फलाहार करें। शाम को भी भगवान शिव का स्मरण करें और अगले सोमवार को भी इसी तरह व्रत जारी रखें।
श्रावण मास से ही क्यों करें इसकी शुरुआत :
श्रावण मास भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा, व्रत, दान या ध्यान करता है, उसे उसका कई गुना फल मिलता है। इसी श्रावण माह में यदि कोई व्यक्ति सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत करता है, तो उसे न केवल सांसारिक सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मन की शांति भी मिलती है। यह व्रत पुराने कर्मों के दोषों को भी शांत करता है। कहा जाता है कि जब यह उपवास पूरी श्रद्धा और सही विधि से किया जाता है, तो भगवान शिव भक्त की हर सच्ची इच्छा जरूर पूरी करते हैं।
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