धर्म-अध्यात्म

Skanda Shashti 2025: स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय को ऐसे करें प्रसन्न, घर में बनी रहेगी खुशियां

Sarita
31 May 2025 11:38 AM IST
Skanda Shashti 2025: स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय को ऐसे करें प्रसन्न, घर में बनी रहेगी खुशियां
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Skanda Shashti: हिंदू धर्म शास्त्रों में स्कंद षष्ठी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. स्कंद षष्ठी का व्रत हर माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान कार्तिकेय को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय का पूजन औ व्रत करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं|
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की षष्ठी तिथि सोमवार 3 फरवरी की सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुर होगी. ये तिथि अगले दिन 4 फरवरी को सुबह 4 बजकर 37 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, माघ महीने में स्कंद षष्ठी का व्रत 3 फरवरी को रखा जाएगा|
स्कंद षष्ठी पूजा विधि:
स्कंद षष्ठी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. फिर साफ कपड़े पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प करना चाहिए.
इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर रखनी चाहिए.
भगवान कार्तिकेय की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराना और चंदन, रोली से तिलक लगाना चाहिए.
भगवान कार्तिकेय के सामने दीया और धूप-बत्ती जलानी चाहिए.
पूजा के दौरान भगवान कार्तिकेय को फल, फूल, मिठाई और नैवेद्य चढ़ाना चाहिए.
पूजा के समय स्कंद षष्ठी की व्रत कथा अवश्य ही सुननी चाहिए.
भगवान कार्तिकेय के ॐ षडानन स्कन्दाय नमः मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए|
भगवान कार्तिकेय को प्रसन्न करने के लिए दिन भर व्रत रखना चाहिए.
स्कंद षष्ठी के दिन सिर्फ सात्विक भोजन ही करना चाहिए.
भगवान कार्तिकेय की फोटो या प्रतिमा की तीन बार परिक्रमा करनी चाहिए.
रात में भगवान कार्तिकेय की आरती करके ही फलाहार करना चाहिए.
ब्राह्मणों और गरीबों को दान देना चाहिए|
स्कंद षष्ठी के व्रत का महत्व:
भगवान कार्तिकेय शिव जी और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र हैं. स्कंद षष्ठी के दिन उनका पूजन और व्रत करने से सभी प्रकार के दुखों के मुक्ति मिलती है. जीवन में आ रहीं सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. साथ ही सफलता, समृद्धि और सुख-शांति प्राप्त होती है. भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति कहे जाते हैं. इसलिए इस दिन पूजा पाठ और व्रत करने वालों को विशेष लाभ मिलता है. उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. स्कंद षष्ठी का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति भी होती है|
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