धर्म-अध्यात्म

Religion Spirituality: श्री राधा रानी ने जगन्नाथ मंदिर को दिया था यह श्राप

Kanchan
4 July 2024 3:39 PM IST
Religion Spirituality: श्री राधा रानी ने जगन्नाथ मंदिर को दिया था यह श्राप
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Religion Spiritualityधर्म अध्यात्म: पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा अत्यंत उत्साह के साथ निकलती है। इस यात्रा को गुंडिचा यात्रा और रथ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2024 में भगवान जगन्नाथLord Jagannathरथ यात्रा का शुभारंभ 07 जुलाई से हो रहा है। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में लोग जप-कीर्तन कर गुंडीचा नगर तक जाते हैं। जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा जी विराजमान हैं। हर वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। यह यात्रा देश-विदेश में अधिक प्रसिद्ध है। इसमें अधिक संख्या में भीड़ शामिल होती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ मंदिर में अविवाहित जोड़ों को नहीं जाना चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्री राधा रानी ने जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने का विचार किया था।

जब वह मंदिर में प्रवेश कर रही थीं, तो उनके पुजारी ने रोक दिया। इसके बाद पुजारी से इसके बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि आप श्री कृष्ण की प्रेमिका हैं और विवाहा भी नहीं हैं। इस कारण से भगवान श्री कृष्ण की पत्नी को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए आपको भी मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है। इस कारण से राधा रानी पुजारी की इस बात से नाराजगी हो गई। इसके बाद राधा रानी ने जगन्नाथ मंदिरJagannath Temple को श्राद्ध किया कि यदि जीवन में कोई अविवाहित जोड़ा एक साथ मंदिर में प्रवेश करेगा, तो उसे कभी भी प्रेमी या प्रेमिका का प्यार नहीं मिलेगा। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत होगी। 07 जुलाई, 2024 को सुबह 04 बजकर 26 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 08 जुलाई, 2024 को सुबह 04 बजकर 59 मिनट पर होगा।

ऐसे में जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 07 जुलाई से हो रही है। यात्रा के लिए 3 रथ बनाए जाते हैं। इन रथों में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अलग-अलग रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर जाते हैं। वहां कुछ दिन विश्राम करने के बाद वापस आते हैं। बताया जाता है कि इन रथों को नेम के पेड़ों की लक्सिज़ की सहायता से बनाया गया है। सबसे खास बात यह है कि इन रथों को बनाने के लिए किसी भी धातु और कील का प्रयोग नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के रथ को खींचने वाले साधक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। रथ यात्रा में शामिल होने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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