धर्म-अध्यात्म

Shri Kamalapati Ashtakam Benefits: गुरुवार को सच्चे मन से करें श्री कमलापत्यष्टकम् का पाठ,मिलेगा सुख और समृद्धि

Sarita
12 Feb 2026 10:37 AM IST
Shri Kamalapati Ashtakam Benefits:   गुरुवार को सच्चे मन से करें श्री कमलापत्यष्टकम् का पाठ,मिलेगा सुख और समृद्धि
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Shri Kamalapati Ashtakam Benefits: भगवान विष्णु को समर्पित श्री कमलापति अष्टकम् एक प्रचलित अष्टकम् है. जो भी भक्त इस अष्टकम् का पाठ करते हैं उन पर भगवान की कृपा बनी रहती है. श्री कमलापति अष्टकम् को श्री कमलापत्यष्टकम् भी कहते हैं जो एक शक्तिशाली स्तोत्र है. इसका गुरुवार के दिन पाठ करना सांसारिक बाधाओं को दूर करता है. सुख-समृद्धि बढ़ती है और शत्रुओं का नाश होता है. मानसिक शांति मिलती है और पाप कटते हैं. विष्णु-लक्ष्मी की कृपा से घर में धन सौभाग्य बना रहता है|
श्री कमलापत्यष्टकम् पाठ के लाभ:
श्री कमलापत्यष्टकम् का पाठ करने से भगवान विष्णु सदा अपनी कृपा भक्त पर बनाए रखते हैं और साथ में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है|
श्री कमलापत्यष्टकम् का पाठ करने से शत्रुओं से लेकर नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
श्री कमलापत्यष्टकम् का पाठ करने से परम शांति मिलती है और मोक्ष के रास्ते खुलते हैं.
श्री कमलापत्यष्टकम् का पाठ करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन के दुख दूर होते हैं.
श्री कमलापत्यष्टकम् का पाठ करने से जीवन सुखमय होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है|
॥ श्री कमलापत्यष्टकम् ॥
भुजगतल्पगतं घनसुन्दरंगरुडवाहनमम्बुजलोचनम्।
नलिनचक्रगदाकरमव्ययंभजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥1॥
अलिकुलासितकोमलकुन्तलंविमलपीतदुकूलमनोहरम्।
जलधिजाङ्कितवामकलेवरंभजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥2॥
किमु जपैश्च तपोभिरुताध्वरैरपिकिमुत्तमतीर्थनिषेवणैः।
किमुत शास्त्रकदम्बविलोकनैर्भजतरे मनुजाः कमलापतिम्॥3॥
मनुजदेहमिमं भुवि दुर्लभंसमधिगम्य सुरैरपि वाञ्छितम्।
विषयलम्पटतामपहाय वैभजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥4॥
न वनिता न सुतो न सहोदरो नहि पिता जननी न च बान्धवः।
व्रजति साकमनेन जनेन वैभजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥5॥
सकलमेव चलं सचराचरंजगदिदं सुतरां धनयौवनम्।
समवलोक्य विवेकदृशा द्रुतंभजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥6॥
विविधरोगयुतं क्षणभंगुरंपरवशं नवमार्गमलाकुलम्।
परिनिरीक्ष्य शरीरमिदं स्वकंभजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥7॥
मुनिवरैरनिशं हृदि भावितंशिवविरिञ्चिमहेन्द्रनुतं सदा।
मरणजन्मजराभयमोचनंभजत रे मनुजाः कमलापतिम्॥8॥
हरिपदाष्टकमेतदनुत्तमंपरमहंसजनेन समीरितम्।
पठति यस्तु समाहितचेतसाव्रजति विष्णुपदं स नरो ध्रुवम्॥9॥
॥ इति श्रीमत्परमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीकमलापत्यष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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