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धर्म-अध्यात्म
Shraddh Rules: पितृ पक्ष में श्राद्ध के 10 नियम, जिनकी अनदेखी करने पर लग सकता है पितृ दोष
Sarita
2 Sept 2025 7:49 AM IST

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Shraddh Rules: पितृ पक्ष पूर्वजों को समर्पित काल है, जिसमें उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मकांड किए जाते हैं। पितृ पक्ष को आमतौर पर श्राद्ध भी कहा जाता है, जो पूरे 15 दिनों तक चलता है। पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होता है, जो आश्विन अमावस्या को समाप्त होता है। इस बार श्राद्ध पक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा। अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पितृ पक्ष को बहुत शुभ माना जाता है।
इस 15 दिनों की अवधि में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। हालाँकि, पितृ पक्ष में श्राद्ध करने के कुछ विशेष नियम हैं, जिनकी अनदेखी करने पर पितृ दोष लग सकता है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष में श्राद्ध के क्या नियम हैं।
श्राद्ध के नियम क्या हैं?
पितरों के लिए किया जाने वाला श्राद्ध हमेशा कृष्ण पक्ष में ही करना चाहिए। इसी प्रकार, श्राद्ध और तर्पण आदि के लिए दोपहर का समय सुबह के समय से अधिक पवित्र माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान प्रातःकाल, शुक्ल पक्ष और अपने जन्मदिन पर कभी भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस समय किया गया श्राद्ध फलदायी नहीं होता।
श्राद्ध से संबंधित कार्य संध्या काल में सूर्यास्त के समय और रात्रि के समय कभी नहीं करने चाहिए, क्योंकि इसे राक्षसी समय कहा जाता है। इस समय किया गया श्राद्ध फलदायी नहीं होता।
पितृ पक्ष के दौरान किसी दूसरे की भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। यदि अपने घर या भूमि पर श्राद्ध करना संभव न हो, तो किसी मंदिर, तीर्थ, नदी तट या वन में जाकर श्राद्ध करना चाहिए।
श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने के लिए कम से कम एक या तीन ब्राह्मणों को आमंत्रित करना चाहिए। श्राद्ध कर्म में गाय के घी और दूध का उपयोग करना चाहिए।
श्राद्ध में ब्राह्मण को श्रद्धा और आदरपूर्वक आमंत्रित करना चाहिए। श्राद्ध के दौरान ब्राह्मण की सेवा या दान करते समय अभिमान नहीं करना चाहिए।
ब्राह्मण को श्राद्ध का भोजन मौन रहकर ग्रहण करना चाहिए और व्यंजन या श्राद्धकर्ता को प्रसन्न करने के लिए उसकी प्रशंसा नहीं करनी चाहिए।
पितृ निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध में किसी मित्र को आमंत्रित नहीं करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि श्राद्ध के भोजन में किसी मित्र को आमंत्रित करने से श्राद्ध पुण्यहीन हो जाता है।
पितृ पक्ष के दौरान, श्राद्ध के लिए कुतपकाल में दान करना सदैव शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। श्राद्ध का भोजन गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों को भी देना चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध का भोजन बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भोजन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके न बनाया जाए।
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