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धर्म-अध्यात्म
Shiv Parivar: शिव परिवार से मिलती है अनमोल सीख, पूजा से घर में आती है सुख-शांति और समृद्धि
Sarita
20 Feb 2026 9:59 AM IST
Shiv Parivar: भगवान शिव की आराधना केवल कल्याण का मार्ग ही नहीं बल्कि परिवार, संतुलन और सामंजस्य की उस परम्परा का भी उत्सव है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण शिव परिवार में मिलता है। जहां श्रद्धालु महादेव की उपासना कर आत्मिक शांति और आशीर्वाद की कामना करते हैं, वहीं शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय का संयुक्त स्वरूप हमें यह सिखाता है कि भिन्न स्वभाव और विचारों के बावजूद प्रेम और स्वीकार्यता से ही घर स्वर्ग बनता है। शिव परिवार को एक आदर्श परिवार माना जाता है।
उनकी पूजा करने से घर में पारिवारिक सुख, शांति और सद्भाव आता है। यह पूजा इस बात का प्रतीक है कि कैसे अलग-अलग गुणों वाले सदस्य एक साथ प्रेम और सामंजस्य से रह सकते हैं। शिव परिवार की पूजा करने से आप एक साथ कई देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
शिवजी सृष्टि के संहारक और तपस्वी हैं, माता पार्वती शक्ति और मातृत्व की प्रतीक हैं, गणेशजी बुद्धि, ज्ञान और विघ्नहर्ता हैं, कार्तिकेयजी साहस और शक्ति के प्रतीक हैं। एक साथ इनकी पूजा करने से आपको जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है। महादेव शिव की पूजा जीवन में संतुलन स्थापित करने में मदद करती है। भगवान शिव वैराग्य को दर्शाते हैं, जबकि माता पार्वती गृहस्थ जीवन की प्रतीक हैं।
इन दोनों की पूजा से यह संदेश मिलता है कि आध्यात्मिकता और सांसारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। पुराणों में महादेव की कथाओं का जिस तरह वर्णन किया गया है उनमें वह कृपालु, दयालु और जल्दी प्रसन्न हो जाने वाले देवता के रूप में सामने आते हैं।
उनकी सबसे बड़ी खासियत है कि वह परिवार वाले हैं और परिवार की कल्पना के पहले उदाहरण हैं, जिसमें पति-पत्नी, बेटे-बेटियां, भाई-बहन का पूरा ब्योरा मिलता है। सनातनी कहानियों के जरिए जब एक आदर्श परिवार का उदाहरण दिया जाता है तो श्रीराम से भी पहले शिव परिवार का नाम लिया जाता है। कहते हैं कि सबसे अधिक विरोधियों वाला परिवार शिव परिवार ही है, लेकिन विभिन्नता में भी एकता की वे मिसाल हैं।
जैसे कि शिवजी का वाहन नंदी एक बैल है, जबकि पार्वतीजी का वाहन केहरि एक शेर है। शेर और बैल एक-दूसरे के विरोधी हैं। शिवजी के गले में पड़ा नाग, गणेशजी के वाहन चूहे का विरोधी है, तो वहीं कार्तिकेयजी का वाहन मोर, शिवजी के नाग का विरोधी है। आपस में इतना विरोध होने के बाद भी शिव परिवार में जो प्रेम है, वही हमारे परिवारों में होना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इसीलिए शिव परिवार की एक साथ पूजा की जाती है। वहीं शिवजी तथा पार्वती जी से सुखी दांपत्य जीवन के लिए भी अनमोल सीख मिलती हैं।
पति और पत्नी एक हैं - भगवान भोलेनाथ को अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है जिसका मतलब है- आधा पुरुष और आधा स्त्री होना। उनका यह रूप हर शादीशुदा जोड़े के लिए एक सीख है, जो यह दर्शाता है कि भले ही पति-पत्नी का शरीर अलग हो लेकिन मन से दोनों एक ही हैं इसलिए हर पति-पत्नी को समान अधिकार, समान सम्मान मिलना चाहिए। अक्सर दम्पत्तियों में झगड़ों की एक वजह खुद को साथी से बड़ा साबित करना होता है।
अंतरआत्मा से प्यार - माता पार्वती एक खूबसूरत, कोमल और सभी के मन को मोह लेने वाली राजकुमारी थीं लेकिन भोलेनाथ भस्मधारी, गले में सर्प की माला पहनने वाले वैरागी थे। फिर भी माता पार्वती उनसे प्रेम करती थीं। वह उनके रंग-रूप से नहीं बल्कि उनके स्वभाव, निर्मल मन और भोलेपन से प्यार करती थीं। गृहस्थ जीवन के लिए जरूरी है कि दोनों साथी एक-दूसरे से प्यार करें न कि उनके रंग-रूप और पैसों को अहमियत दें।
ईमानदारी - किसी रिश्ते में विश्वास और ईमानदारी होना भी जरूरी है। माता पार्वती से भोलेनाथ बहुत प्रेम करते हैं। दोनों एक-दूसरे के प्रति ईमानदार और सम्मान के लिए कुछ भी कर जाने वाले दंपत्ति हैं।
पुराणों के अनुसार मां गौरी शिवजी के अपमान से दुखी होकर सती हो गई थीं, वहीं भगवान भोलेनाथ माता के सती होने से रौद्र रूप में आ गए और दुनिया का विनाश करने के लिए तांडव करने लगे थे। यह उनका एक-दूसरे के प्रति प्रेम और रिश्ते के प्रति ईमानदारी थी, जो हर जोड़े में होनी चाहिए।
आदर्श पत्नी - माता पार्वती शिवजी की अर्धांगनी हैं। भोले बाबा अक्सर तपस्या में लीन रहते हैं लेकिन माता पार्वती उनकी अनुपस्थिति में परिवार, अपने पुत्रों और सभी देवी-देवताओं समेत सृष्टी की देखभाल करती हैं।
इतना ही नहीं, माता पार्वती एक राजकुमारी होने के बावजूद विवाह के बाद भोलेनाथ संग किसी महल में नहीं बल्कि बर्फीले कैलाश पर्वत पर वास करती हैं। पार्वती जी ने सुख-सुविधाओं से दूर अपने पति के जीवन को खुशी से अपनाया।
गृहस्थ जीवन में हर पत्नी को पति संग सुख-दुख में साथ रहने की सीख पार्वती जी देती हैं। सुख-सुविधाएं नहीं, बल्कि पति का साथ आदर्श सुखी जीवन के लिए जरूरी है।
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