धर्म-अध्यात्म

Sheetala Ashtami 2025: शीतला अष्टमी पर माता रानी को क्यों चढ़ाते हैं बासी खाना, जानिए धार्मिक महत्व

Sarita
17 March 2025 10:35 AM IST
Sheetala Ashtami 2025:  शीतला अष्टमी पर माता रानी को क्यों चढ़ाते हैं बासी खाना, जानिए धार्मिक महत्व
x
Sheetala Ashtami 2025: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का दिन बहुत ही खास व महत्वपूर्ण माना गया है. यह पर्व होली के आठ दिन बाद मनाया जाता है. इस दिन माता शीतला का पूजन होता है और उन्हें बासी व ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला अष्टमी की पूजा करने से परिवार को चेचक, खसरा व आंखों से जुड़ी बीमारियों से छुटकारा मिलता है. शीतला अष्टमी को कुछ स्थानों पर बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसमें बासी भोजन का भोग लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस दिन देवी मां को बासाी भोजन का भोग क्यों लगाते हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे छिपी कहानी के बारे में. साथ ही जानें इस साल कब है शीतला अष्टमी|
शीतला अष्टमी 2025 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 मार्च को सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 23 मार्च को सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार इस साल शीतला अष्टमी का पूजन 22 मार्च 2025 को किया जाएगा. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 23 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. लेकिन आमतौर पर शीतला अष्टमा का पूजन सुबह के समय ही किया जाता है|
शीतला माता को क्यों लगतों हैं बासी खाने का भोग?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक दिन माता ने सोचा कि धरती पर चल कर देखें कि उनकी पूजा कौन-कौन करता है. माता एक बुढ़िया का रूप धारण कर राजस्थान के डूंगरी गांव में गई. माता जब गांव में जा रही थी कि तभी ऊपर से किसी ने चावल का उबला हुआ पानी डाल दिया. जिससे माता के पूरे शरीर पर छाले हो गए और पूरे शरीर में जलन होने लगी. माता दर्द में कराहते हुए गांव में सभी से सहायता मांगी परंतु किसी ने भी उनकी सहायता नहीं की|
गांव में कुम्हार परिवार की एक महिला ने जब देखा कि एक बुढ़िया दर्द से कराह रही है तो उसने माता को बुलाकर घर पर बैठाया और बहुत सारा ठंडा जल माता के ऊपर डाला. ठंडे जल के प्रभाव से माता को उन छालों की पीड़ा में राहत महसूस हुई. इसके बाद कुम्हारिन महिला ने माता से कहा कि मेरे पास केवल रात के दही और राबड़ी रखी हुई हैं आप इनको खाये. रात के रखे दही और ज्वार की राबड़ी खा कर माता को शरीर में बहुत ठंडक मिली. इसके बाद कुम्हारिन ने माता से कहा कि आपके बाल बिखरे है लाइए मैं इनको गूथ देती हूं|-
जैसे ही वह महिला माता शीतला की चोटी बनाने लगी तो उसे बालों के नीचे छुपी तीसरी आंख दिखी. यह देखकर वह डर कर भागने लगी. तभी माता ने कहा बेटी डरो मत में शीतला माता हूं और मैं धरती पर ये देखने आई थी कि मेरी पूजा कौन करता है. माता शीतला अपने मूल रूप में प्रकट हो गई. कुम्हारिन महिला शीतला माता को देख कर भाव विभोर हो गई. उस कुम्हारिन ने माता से कहा माता मैं तो बहुत गरीब हूं. आपको कहा बैठाऊ. मेरे पास तो आसन भी नहीं है. माता मुस्कुराते कुम्हारिन के गधे पर जाकर बैठ गई और झाडू से कुम्हारिन के घर से सफाई कर डलिया में डाल कर उसकी गरीबी को बाहर फेंक दिया| कुम्हारिन के निस्वार्थ श्रद्धा भाव से प्रसन्न होकर माता ने उससे वर मांगने को कहा. कुम्हारिन ने हाथ
जोड़कर
कहा माता आप वर देना चाहती है तो आप हमारे डूंगरी गांव में ही निवास करे और जो भी इंसान आपकी श्रद्धा भाव से सप्तमी और अष्टमी को पूजा करें और व्रत रखे तथा आपको ठंडा व्यंजन का भोग लगाएं उसकी गरीबी भी ऐसे ही दूर करें. पूजा करने वाली महिला को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दें. माता शीतला ने कहा बेटी ऐसा ही होगा और कहा कि मेरी पूजा का मुख्य अधिकार कुम्हार को ही होगा. कहा जाता है कि इसलिए ही माता शीतला को ठंडा बासी भोजन और शीतल जल प्रिय है|
Next Story