धर्म-अध्यात्म

Sharad Purnima 2025 Date: शरद पूर्णिमा आज है, इस दिन की खीर को अमृत समान क्यों कहा जाता है

Sarita
6 Oct 2025 11:17 AM IST
Sharad Purnima 2025 Date: शरद पूर्णिमा आज है, इस दिन की खीर को अमृत समान क्यों कहा जाता है
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Sharad Purnima 2025 Date: पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा आज, सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृत वर्षा करता है। यह तिथि देवी लक्ष्मी को समर्पित है और ऐसा माना जाता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो लोग जागरण करके उनकी पूजा करते हैं, उन पर विशेष कृपा बरसाती हैं। लेकिन इस दिन की एक और विशेष परंपरा है चांदनी में खीर का भोग लगाना, जिसे अमृत तुल्य माना जाता है।
इस दिन खीर को 'अमृत समान' क्यों कहा जाता है?
धार्मिक मान्यता: अमृत वर्षा का आशीर्वाद:
चंद्रमा की 16 कलाएँ: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है, जिससे उसकी किरणें अत्यंत शक्तिशाली और अमृत तुल्य हो जाती हैं।
औषधीय गुण: ऐसा माना जाता है कि खीर को रात भर खुले आसमान के नीचे रखने से चंद्रमा की अमृततुल्य किरणें उसमें समाहित हो जाती हैं और उसे औषधीय गुण प्रदान करती हैं।
देवी लक्ष्मी को प्रिय: खीर को पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें खीर का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
स्वास्थ्य लाभ और वैज्ञानिक पहलू:
पित्त शमन: आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु में शरीर में पित्त की मात्रा बढ़ जाती है। दूध और चावल से बनी खीर ठंडी होती है, जो पित्त को शांत करने में मदद करती है।
शीतलता और ऊर्जा: खीर को रात भर ठंडी चांदनी में रखने से यह और भी ठंडी हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि अगली सुबह इस खीर का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आँखों की रोशनी बढ़ती है। यह श्वसन रोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
शरद पूर्णिमा 2025: खीर रखने का शुभ मुहूर्त और समय:
पूर्णिमा तिथि दोपहर 12:23 बजे से शुरू होती है।
पूर्णिमा तिथि अगले दिन, 7 अक्टूबर को सुबह 9:16 बजे समाप्त हो रही है।
चंद्रोदय का समय शाम 5:27 बजे (लगभग) है।
खीर रखने का सबसे अच्छा समय रात 10:53 बजे (भद्रा काल समाप्त होने के बाद) है।
ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, जो रात 10:53 बजे समाप्त होगा। इसलिए, भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही खीर को चांदनी में रखना शुभ माना जाता है।
सबसे पहले गाय के दूध और चावल से खीर तैयार करें। शाम को स्नान करने के बाद, देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करें। खीर का भोग लगाएँ। रात में, खीर को एक साफ बर्तन में ढककर खुले आसमान के नीचे या छत पर चांदनी में रख दें। इस रात कोजागरी पूर्णिमा के उपलक्ष्य में देवी लक्ष्मी का आह्वान करते हुए जागरण करने का भी रिवाज है। अगले दिन स्नान के बाद सबसे पहले इस खीर को भगवान को अर्पित करें, फिर पूरे परिवार में प्रसाद के रूप में बांटें और फिर स्वयं भी इसका सेवन करें।
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