धर्म-अध्यात्म

Shanichari Amavasya 2025: कैसे करें शनिदेव की पूजा, किस मंत्र का करें जाप

Sarita
23 Aug 2025 10:29 AM IST
Shanichari Amavasya 2025: कैसे करें शनिदेव की पूजा, किस मंत्र का करें जाप
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Shanichari Amavasya 2025: जब भी किसी शनिवार को अमावस्या का संयोग बनता है, उसे शनिचरी अमावस्या कहते हैं। इसे एक दुर्लभ संयोग माना जाता है क्योंकि ऐसा साल में 1 या 2 बार ही होता है। शनिचरी अमावस्या पर शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है। यही वजह है कि इस दिन शनि मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस बार शनिचरी अमावस्या का पर्व 23 अगस्त को मनाया जाएगा। जानिए इस दिन कैसे करें शनिदेव की पूजा, किस मंत्र का करें जाप और शुभ मुहूर्त की जानकारी|
शनिश्चरी अमावस्या पूजा विधि:
- 23 अगस्त, शनिवार की सुबह सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। ऊपर बताए किसी एक मुहूर्त में पूजा की तैयारी करें।
- किसी शनि मंदिर में पूजा करें। अगर घर पर ही शनिदेव की पूजा करना चाहते हैं तो शनिदेव का चित्र या प्रतिमा साफ स्थान पर स्थापित करें।
- सबसे पहले सरसों के तेल से शनिदेव का अभिषेक करें। इस तेल में काले तिल, काली उड़द भी डालें। काले वस्त्र शनिदेव को अर्पित करें।
- अपराजिता के फूल शनिदेव को चढ़ाएं। पूजा के दौरान ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप मन ही मन में निरंतर करते रहें।
- पूजा के बाद उड़द व चावल की खिचड़ी का भोग लगाएं। ये खिचड़ी सरसों के तेल में बनाएं। अंत में शनिदेव की आरती करें।
- इस तरह शनिश्चरी अमावस्या पर जो शनिदेव की पूजा करता है, शनिदेव की कृपा उस पर बनी रहती है और परेशानियां दूर होती हैं।
भगवान शनिदेव की आरती:
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव.…
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव.…
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव.…
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव.…
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
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