धर्म-अध्यात्म

Shani Pradosh Vrat Katha: अक्तूबर का पहला प्रदोष व्रत आज , इस कथा के पाठ से आएगी सुख-समृद्धि

Sarita
4 Oct 2025 8:19 AM IST
Shani Pradosh Vrat Katha: अक्तूबर का पहला प्रदोष व्रत आज , इस कथा के पाठ से आएगी सुख-समृद्धि
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Shani Pradosh Vrat Katha: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर माह दो बार आता है, जो शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत शनिवार को आता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस बार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 4 अक्तूबर 2025, शनिवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और शनि ग्रह से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं। शनि प्रदोष व्रत में कथा और मंत्र जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ- 4 अक्तूबर 2025 को शाम 05:09 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त- 5 अक्तूबर 2025 को दोपहर 03:03 बजे
प्रदोष पूजा मुहूर्त- शाम 06:03 से रात 08:30 बजे तक
इस अवधि में प्रदोष व्रत की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
शनि प्रदोष व्रत कथा:
प्राचीन समय की कथा के अनुसार, एक नगर में एक धनी सेठ और उनकी पत्नी रहते थे। घर में धन-समृद्धि की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण दोनों अत्यधिक दुखी रहते थे। एक दिन उन्होंने निर्णय लिया कि अपना व्यापार नौकरों को सौंपकर वे दोनों तीर्थयात्रा पर निकलेंगे।
यात्रा के दौरान जब वे नगर से बाहर पहुंचे, तो उन्हें एक साधु दिखे जो गहन ध्यान में लीन थे। सेठ और उनकी पत्नी साधु के पास जाकर बैठ गए। जब साधु ने आंखें खोलीं तो उन्होंने सेठ-सेठानी की पीड़ा समझ ली। साधु ने उनसे कहा “मैं तुम्हारा दुख जानता हूं। यदि तुम शनि प्रदोष व्रत पूरी श्रद्धा से करोगे, तो तुम्हें संतान सुख अवश्य मिलेगा।” साधु ने उन्हें प्रदोष व्रत की विधि समझाई और भगवान शिव की स्तुति करने के लिए यह वंदना बताई-
हे रुद्रदेव शिव नमस्कार ।
शिवशंकर जगगुरु नमस्कार ॥
हे नीलकंठ सुर नमस्कार ।
शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार ॥
हे उमाकांत सुधि नमस्कार ।
उग्रत्व रूप मन नमस्कार ॥
ईशान ईश प्रभु नमस्कार ।
साधु के आशीर्वाद के बाद सेठ-सेठानी अपनी तीर्थयात्रा पर आगे बढ़ गए। लौटकर उन्होंने पूरे विधि-विधान से शनि प्रदोष व्रत किया। भगवान शिव और शनि देव की कृपा से शीघ्र ही उनके घर एक पुत्र का जन्म हुआ और उनका जीवन खुशियों से भर गया।
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