धर्म-अध्यात्म

Shani Pradosh Vrat 2025: अक्टूबर में दो बार पड़ने वाला 'शनि प्रदोष व्रत' का दुर्लभ संयोग

Sarita
3 Oct 2025 9:05 AM IST
Shani Pradosh Vrat 2025:  अक्टूबर में दो बार पड़ने वाला शनि प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग
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Shani Pradosh Vrat 2025: अक्टूबर 2025 का महीना महादेव के भक्तों और शनिदेव की कृपा पाने वालों के लिए बेहद खास है। प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित होता है और जब यह शनिवार को पड़ता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है, जिसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शनिवार को पड़ने के कारण इस व्रत में भगवान शिव के साथ-साथ कर्मफल दाता शनिदेव की भी पूजा की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से शनि के अशुभ प्रभावों, जैसे साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस वर्ष अक्टूबर 2025 एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, क्योंकि एक ही महीने में दो बार शनि प्रदोष व्रत पड़ेंगे। आइए जानें इनकी तिथियों, महत्व और पूजा विधि के बारे में।

शनि प्रदोष व्रत 2025: अक्टूबर की शुभ तिथियाँ:

पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 2025 में त्रयोदशी तिथि दो बार शनिवार को पड़ेगी, जिससे एक दुर्लभ संयोग बन रहा है।

पहला शनि प्रदोष व्रत: 4 अक्टूबर 2025, शनिवार, आश्विन, शुक्ल पक्ष

दूसरा शनि प्रदोष व्रत: 18 अक्टूबर 2025, शनिवार, कार्तिक, कृष्ण पक्ष

इस बार दूसरा शनि प्रदोष व्रत धनतेरस के शुभ दिन पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

शनि प्रदोष व्रत की पूरी पूजा विधि:

व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन केवल फल या जल ग्रहण करें और सात्विक अनुष्ठानों का पालन करें। शाम को प्रदोष काल से पहले पुनः स्नान करें। एक चौकी पर शिव परिवार (शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय) की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के लिए जल, गाय का दूध, दही, शहद, घी, चीनी, गन्ने का रस आदि का प्रयोग करें।

शिवलिंग पर बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, काले तिल, चंदन और चावल चढ़ाएँ। देवी पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करें। धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएँ। भगवान शिव को खीर, हलवा या अन्य सात्विक प्रसाद चढ़ाएँ। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। इस दिन शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करके भगवान शनि की कृपा प्राप्त करें। शनि प्रदोष व्रत की कथा सुनें। अंत में, भगवान शिव और देवी पार्वती की आरती करें।

विशेष संयोग का फल:

अक्टूबर 2025 में दो बार शनि प्रदोष व्रत का पड़ना भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस अवधि में व्रत करने से अनंत पुण्य फल प्राप्त होते हैं। खासकर शनि ग्रह से पीड़ित लोगों के लिए यह अवसर वरदान साबित होगा।

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